प्रमुख अन्तर्कथाऍ

साहित्य का अध्ययन करते समय बीच-बीच में कुछ ऐसे प्रसंग आ जाते हैं, जिन्हें जाने बिना। अर्थ स्पष्ट महीं हो सकता है। उदाहरण- छुअत शिला भइ नारि सुहाई।”

इस पंक्ति का अर्थ उस समय तक स्पष्ट नहीं होता जब तक विद्यार्थियों को ‘अहिल्या’ के बारे में न बताया जाय, इसे ही अन्तर्कथा कहते हैं। इसका शाब्दिक अर्थ है- (अन्तः + कथा) अर्थात् कविता के अन्दर की कथा। नीचे कुछ ऐसी ही प्रमुख अन्तर्कथाएँ दी जा रही हैं, छात्र इन्हें ध्यान से पढ़ें –

1. अहल्या – अहल्या गौतम मुनि की पत्नी थी। एक दिन जब मुनि स्नान को गए थे, तो इन्द्र चन्द्रमा की सहायता से गौतम मुनि का रूप धारण करके अहल्या के पास गए और उसके साथ दुराचार किया। इस बीच में गौतम मुनि लौट आए और उन्होंने अपने योग बल से सब कुछ जान लिया। उन्होंने इन्द्र को श्राप दिया और अहल्या को भी श्राप देकर शिला बना दिया भगवान श्रीराम के चरणों की धूल से उसका उद्धार हुआ और उसने फिर से स्त्री रूप पाया।

2. अजामिल – यह पापी ब्राह्मण था। इसकी पत्नी साधुओं की खूब सेवा करती थी। साधुओं के आशीर्वाद से इन्हें पुत्र हुआ, जिसका नाम नारायण रखा। मृत्यु के समय जब यमदूत अजामिल को ले जा रहे थे, तो उसने डरकर अपने प्रिय पुत्र ‘नारायण’ को पुकारा। ‘नारायण’ नाम सुनकर । यमदूत भाग गए और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

3. अम्बरीष – राजा अंबरीष वैष्णव भक्त थे। एक बार उन्होंने दुर्वासा ऋषि को भोजन पर बुलाया। दुर्वासा ऋषि जब देर तक नहीं आए, तो अंबरीष ने उनसे पहले ही प्रसाद ग्रहण कर लिया। ऋषि दुर्वासा को जब यह पता लगा, तो वे बहुत क्रोधित हुए तथा एक राक्षसी द्वारा राजा का वध करने के लिए उतारू हो गए। विष्णु भगवान ने अपने भक्त की स्वयं रक्षा कर राक्षसी का वध किया। और उन्हें दुर्वासा के श्राप से बचाया।

4. गज-ग्राह – ऋषि के शाप द्वारा एक राजा हाथी तथा एक गंधर्व ग्राह (मगर) बन गया था। ग्राह नदी में रहता था। एक दिन हाथी उसी नदी में स्नान कर रहा था, ग्राह ने उसका पैर पकड़ लिया और गहरे जल में खींचने लगा। जब हाथी की जौ भर सँड़ पानी से बाहर रही, तो उसने विष्णु भगवान को पुकारा। हाथी की पुकार सुनकर विष्णु भगवान ने नंगे पैर आकर सुदर्शन चक्र से ग्राह को मारकर हाथी को मुक्ति दिलाई।

5. गणिका – यह काशी की एक प्रसिद्ध वेश्या थी। एक दिन यह श्रृंगार करके अपने किसी प्रेमी की प्रतीक्षा कर रही थी लेकिन वह न आया। उसने सोचा कि यदि मैं इतनी देर भगवान का भजन करती तो मेरा कल्याण हो जाता। इस विचार के आते ही उसने वेश्यावृत्ति को त्याग दिया और एक तोता पाल लिया। वह तोते को राम-नाम सिखाने लगी। राम-नाम के प्रभाव से दुराचारी स्त्री भी मोक्ष को प्राप्त हुई।

6. सहस्त्रबाहुं – ये महाबलशाली राजा थे। एक बार वे जमदग्नि ऋषि के आश्चम में पहुँचे। ऋषि के, पास नंदिनी नाम की कामधेनु थी। उसके प्रभाव से उन्होंने राजा का बड़ा सत्कार किया। राजा ने ऋषि से नंदिनी को माँगा किंतु ऋषि ने नहीं दिया। इस पर राजा ने ऋषि को मार डाला किंतु कामधेनु उसे नहीं मिली। बाद में जमदग्नि के पुत्र परशुराम ने राजा का सेना सहित संहार कर डाला।

7. शबरी – यह मतंग ऋषि की सेविका थी और भगवान राम की भक्त थी। सीता की खोज करते हुए जब रामचन्द्र जी शबरी के आश्रम में पहुँचे, तब उसने उनका बड़ा सत्कार किया भगवान ने इसके जूठे बेर खाए और शबरी, को राम भक्ति का उपदेश दिया और शबरी ने श्रीराम को बताया कि वे पंपापुर में जाकर सुग्रीव से मित्रता करें। भगवान की कृपा से शबरी को सद्गति प्राप्त हुई।

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