Up Class 10 हिंदी : काव्य-सौन्दर्य के तत्त्व

रस 10 रस परिभाषा-‘रस’ का अर्थ है–‘आनन्द’ अर्थात् काव्य से जिस आनन्द की अनुभूति होती है, वही ‘रस’ है। इस प्रकार किसी काव्य को पढ़ने, सुनने अथवा अभिनय को देखने पर पाठक, श्रोता या दर्शक को जो आनन्द प्राप्त होता है, उसे ‘रस’ कहते हैं। रस को ‘काव्य की आत्मा’ भी कहा जाता है। रस …

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छन्द 10 छन्द परिभाषा–छन्द का अर्थ है—बन्धन। जिस रचना में मात्रा, वर्ण, गति, विराम, तुक आदि के नियमों । का विचार रखकर शब्द-योजना की जाती है, उसे छन्द कहते हैं। इस प्रकार छन्द नियमों का एक बन्धन है। छन्द प्रयोग के कारण  ही रचना पद्य कहलाती है और इसी से उसमें संगीतात्मकता उत्पन्न हो जाती …

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अलंकार 10 अलंकार परिभाषा–अलंकार का अर्थ है-‘आभूषण’; जैसे आभूषण सौन्दर्य को बढ़ाने में सहायक होते हैं, उसी प्रकार काव्य में अलंकारों का प्रयोग करने से काव्य की शोभा बढ़ जाती है; अत: काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्त्वों को अलंकार कहते हैं। अलंकारों  के प्रयोग से शब्द और अर्थ में चमत्कार उत्पन्न होता है। आचार्य …

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