Chapter 1 चिर महान (मंजरी)

समस्त पद्यांशों की व्याख्या

जगजीवन …………………………………… हित समान।

संदर्भ – यह पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक “मंजरी’ के ‘चिर महान’ नामकं पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता कविवर सुमित्रानन्दन पन्त हैं।

प्रसंग – प्रस्तुत कविता में भर्य, संशय, अन्धभक्ति से दूर रहकर मानवसेवा और भाईचारे की स्थापना पर बल दिया गया है। कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि मुझे ऐसी शक्ति प्रदान करो, जिससे मैं लोक-कल्याण करके अपना जीवन सार्थक कर सकें।

व्याख्या – कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहता है कि हे प्रभु! मैं उसका प्रेमी बनूं, जो समान रूप में मनुष्यमात्र को कल्याण करने वाला हो; संसाररूपी जीवन में जो दीर्घकाल तक रहने वाला हो; श्रेष्ठ सौंदर्य से परिपूर्ण और हृदय में सत्य धारण करने वाला हो।

जिससे जीवन में ……………………. अखिल व्यक्ति।

संदर्भ एवं प्रसंग – पूर्ववत् ।

व्याख्या – हे प्रभु! मैं वह प्रकाश बन सकें, जिसमें सम्पूर्ण प्राणी समाहित हो जाएँ, जिससे जीवन में शक्ति प्राप्त हो तथा भय, शक, संदेह एवं बिना सोच-विचार और अन्धविश्वास के किसी के प्रति निष्ठा रखने की भावना का निवारण हो सके।

पाकर प्रभु …………………….. विहान।

संदर्भ एवं प्रसंग – पूर्ववतु।

व्याख्या – हे प्रभु! तुझसे संसार के मनुष्यमात्र की पूर्ण रक्षा करने का अमरदान प्राप्त कर मैं कृतज्ञ हूँ। मुझे ऐसी शक्ति दो कि मैं एक बार पुनः नए जीवन का प्रातःकाल ला सकें, अर्थात् प्राणिमात्र को सुखी व समृद्ध बना सकें।

शब्दार्थ – जगजीवन = संसार के लोगों के जीवन में, चिर = दीर्घकाले तक रहने वाला, महान = बड़ा, संत्यप्राण = जिसका हृदय सत्य से भरा हो, मानव के हित समान = जो मानव का हितैषी हो, भय = डर, संशय = संदेह, अन्धभक्ति = बिना सोचे-समझे किसी के प्रति निष्ठा का भाव रखना, अखिल = सम्पूर्ण/सारा, मानव = मनुष्य, परित्राण = पूर्ण रक्षा, नव = नया, विहान = प्रातःकाल, भोर।

कविता का भावार्थ प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को

प्रश्न 1.
ईश्वर भक्ति से संबंधित अन्य कविताओं का संकलन कीजिए।
उत्तर :

प्रार्थना

हर देश में तू हर वेष में तू, तेरे नाम अनेक तू एक ही है!
तेरी रंग भूमि यह विश्व धरा, हर खेल में, मेल में तू ही तो है!!
सागर से उठा बादल बनकर, बादल से गिरा जल होकर के!!
फिर नहर बनी नदिया गहरी, तेरे भिन्न प्रकार तू एक ही है!!
हर देश में ………………………………………..!
चींटी सा अणु परमाणु बना!!
हर जीव जगत का रूप लिया, कहीं पर्वत वृक्ष-विशाल बना!!
सौन्दर्य तेरा तू एक ही है, हर देश में ………………!
यह दिव्य दिखाया है जिसने, वह है गुरुदेव की पूर्ण दया!!
टुकड़ा कहीं और न कोई दिखा! बस मैं और तू सब एक ही हैं!!
हर देश में ……………………… !

विचार और कल्पना

प्रश्न 1.
संसार में मानव कल्याण के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं? अपना विचार व्यक्त कीजिए। अगर आपको ईश्वर से संसार के कल्याण का वरदान मिल जाए, तो आप क्या-क्या करेंगे?
उत्तर :
ऐसे अनेक उपाय हैं जो संसार में मानव कल्याण के लिए किए जा सकते हैं। सबसे पहले हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे इस संसार में कोई भूखा न रहे। सबको भर पेट भोजन, पहनने को कपड़े और रहने को घर मिले। इसके बाद दूसरा प्रयास यह होना चाहिए कि संसार में सर्वत्र शांति और भाईचारे का माहौल हो। जिसके लिए सभी को मिल-जुल कर प्रयास करने चाहिए। अगर हमें संसार के कल्याण के लिए ईश्वर से वरदान मिल जाये तो सबसे पहले मैं गरीबों, दलितों, शोषितों तथा वंचितो  का कल्याण करना चाहूँगा ताकि उनके भी जीवन में खुशहालीं आ सके और वे भी समाज में सबके साथ मिल-जुल कर रह सकें। हमारे समाज में बहुत विषमता आ गई है। अतः मैं प्रयास करूंगा कि समाज में समता आए। कोई गरीब न रहे, कोई भूखा न रहे, सभी सुखी एवं खुश रहें। कोई किसी को न सताए, सभी मिलजुल कर रहें।

कविता से

प्रश्न 1.
इस कविता में आया ‘सत्यप्राण’ शब्द अच्छे गुण का सूचक है और ‘भय’ शब्द दुर्गुण अर्थात अच्छे गुण का सूचक नहीं है। इसी प्रकार, कविता को पढ़कर इसमें आए अच्छे गुण वाले शब्दों और दुर्गुण वाले शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर :
अच्छे गुण वाले शब्द – सत्यप्राण, महान, सौंदर्यपूर्ण, प्रेमी, हित, शक्ति, प्रकाश, अमर, दान, परित्राण, नवजीवन।
दुर्गुण वाले शब्द – भय, संशय, अन्धभक्ति।

प्रश्न 2.
कवि विश्व में नवजीवन को विहान क्यों लाना चाहता है?
उत्तर :
मानवता की सम्पूर्ण सुरक्षा, सुख-समृद्धि और विकास के लिए कवि विश्व में नवजीवन का विहान लाना चाहता है।

प्रश्न 3.
इस कविता का शीर्षक ‘चिर महान’ है। आपको इस कविता का कोई और शीर्षक देना हो, तो क्या शीर्षक देना चाहेंगे? उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
उत्तर :
इस कविता का अन्य शीर्षक हो सकता है – ‘नवजीवन का विहान’ ।

प्रश्न 4.

(क) निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

1. जग-जीवन …………………………….. सत्य-प्राण।
उत्तर :
भाव – जो संसार रूपी जीवन में दीर्घकाल तक रहने वाला, श्रेष्ठ सौंदर्य से परिपूर्ण और हृदय में सत्य धास्ण करने वाला हो।

2. जिससे जीवन में ………………………… अन्धभक्ति
उत्तर :
भावं –  हे प्रभु! मुझे ऐसी शक्ति दो जिससे मेरे अंदर भय, शक, संदेह और बिना सोच-विचार के किसी के प्रति निष्ठा रखने की भावना का उदय हो।

(ख) नीचे ‘क’ वर्ग में दी गई पंक्तियों से सम्बन्धित कुछ पंक्तियाँ ‘ख’ वर्ग में दी गई हैं। किन्तु वे क्रम में नहीं हैं, उन्हें ‘क’ वर्ग की सम्बन्धित पंक्तियों के नीचे लिखिए-
उत्तर :

  1. मैं उसका प्रेमी बनू नाथ
    जो हो मानव के हित समान।
  2. मैं वह प्रकाश बन सकें नाथ
    मिल जाएँ जिसमें अखिल व्यक्ति।
  3. ला सकें विश्व में एक बार
    फिर से नवजीवन का विहान।

भाषा की बात

1. ‘चिर’ शब्द का अर्थ है ‘सदैव’, यह महान के पूर्व विशेषण के रूप में जुड़ा है। इसी प्रकार, ‘चिर’ विशेषण लगाकर तीन नए शब्द बनाइए; जैसे- चिर नवीन।
उत्तर :
चिर युवा, चिर यौवन, चिर आयु (चिरायु)।

2. और 3. नंबर में दिए गए बिंदुओं को विद्यार्थी ध्यान से पढ़े और विशेषण, विशेष्य एवं क्रिया विशेषण के बारे में समझें।

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