Chapter 1 वीणावादिनि वर दे (मंजरी)

वीणा वादिनी वर दे का भावार्थ समस्त पद्यांशों की व्याख्या

वीणावादिनि वर दे।………………………………………………………………… जग कर दे।
शब्दार्थ:
रव
= ध्वनि,
अंध-उर = अज्ञानपूर्ण हृदय,
कलुष = मलिनता, पाप,
अमृत-मन्त्र = ऐसे मन्त्र जो अमरत्व की ओर ले जाएँ, कल्याणकारी मन्त्र।
संदर्भ- प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक
‘मंजरी’ के ‘वीणावादिनि वर दे‘ नामक कविता से ली गई है। इस पाठ के रचयिता सुविख्यात कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’ हैं।
प्रसंग-इसमें कवि ने सरस्वती माँ की वन्दना की है।
व्याख्या-कवि सरस्वती माता से प्रार्थना करता है कि हे वीणा वादिनी सरस्वती! तुम हमें वर दो
और भारत के नागरिकों में स्वतन्त्रता की भावना का अमृत मन्त्र भर दो। हे माता! तुम भारतवासियों के अन्धकार से व्याप्त हृदय के सभी बन्धन काट दो और ज्ञान का स्रोत बहाकर जितने भी पाप-दोष, अज्ञानता हैं, उन्हें दूर करो और उनके हृदयों को प्रकाश से जगमग कर दो।
नव गति, नवे ……………………………………………………………………………. नव स्वर दे।
शब्दार्थ:
मन्द्ररव = गम्भीर ध्वनि,
विहग-वृन्द = पक्षियों का समूह
संदर्भ एवं प्रसंग-पूर्ववत्।
व्याख्या-कवि प्रार्थना करता है कि हे माँ सरस्वती! तुम हम भारतवासियों को नई गति, नई लय, नई ताल व नए छन्द्, नई वाणी और बादल के समान गम्भीर स्वरूप प्रदान करो। तुम नए आकाश में विचरण करने वाले नए-नए पक्षियों के समूह को नित्य नए-नए स्वर प्रदान करो। हे माँ सरस्वती! हमें ऐसा ही वर दो।

कविता का अर्थ प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को-                नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।
विचार और कल्पना
प्रश्न-
इस कविता में कवि द्वारा माँ सरस्वती से भारत और संसार के लिए अनेक वरदान माँगे गये हैं। आप अपने विद्यालय के लिए क्या-क्या वरदान माँगना चाहेंगे?
उत्तर-
हम अपने विद्यालय के लिए शिक्षा-प्रसार में अग्रणी तथा ख्याति प्राप्त होने का वरदान माँगेंगे।
कविता से
प्रश्न 1.
कविता में भारत के लिए क्या वरदान माँगा गया है? उत्तर- कविता में भारत के लिए स्वतन्त्रता, अमरत्व, ज्ञान और नव-जागरण का वरदान माँगा गया है।

प्रश्न 2.
तालिका के खण्ड ‘क’ और खण्ड ‘ख’ से शब्द चुनकर शब्द-युग्म बनाईए
उत्तर-

प्रश्न 3.
पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क) काट अन्ध-उर के बन्धन-स्तर, बहा जननी, ज्योतिर्मय निर्झर।
भाव: अज्ञानी पुरुषों का अज्ञान दूर करो और ज्ञान का स्रोत बहा दो।
(ख) कलुष-भेद तम हर, प्रकाश भर, जगमग जग कर दे।
भाव: जितने भी पाप-दोष तथा अज्ञानता हैं. उन्हें दूर करें और ज्ञान के प्रकाश से संसार को जगमग कर दो।
(ग) नव गति, नव लय, ताल-छन्द नव, नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव।
भाव: कवि प्रार्थना करता है कि हे माँ सरस्वती! तुम हम भारतवासियों को नई गति, नई लय, नई ताल, नए छंद व नई वाणी दो और बादल के समान गंभीर स्वरूप प्रदान करो।

भाषा की बात-

प्रश्न 1.
कविता में आए ‘वर दे’, ‘भर दे’ की तरह अन्य तुकान्त शब्दों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर-
‘कर दे’, ‘स्वर दे’, अन्य तुकान्त शब्द हैं।

प्रश्न 2. 
ज्योतिः + मय = ज्योतिर्मय, निः+ झर = निर्झर। इन शब्दों में विसर्ग का रेफ हुआ है। यह विसर्ग सन्धि है। इसी प्रकार के दो शब्द लिखिए तथा उनका सन्धि विच्छेद कीजिए।
उत्तर-
दुः + गति = दुर्गति, निः + धन = निर्धन

प्रश्न 3.
विभक्ति को हटाकर शब्दों के मेल से बनने वाला शब्द समास कहलाता है। ‘वीणा वादिनी’ का अर्थ है ‘वीणा को बजाने वाली’ अर्थात् सरस्वती। यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है। इसी प्रकार गजानन, पीताम्बर, चतुरानन शब्दों में भी बहुव्रीहि समास है। इनका विग्रह कीजिए।
उत्तर-
गजानन- गज के समान आनन (सिर) है जिसका अर्थात श्री गणेश पीताम्बर- पीले हैं अंबर (वस्त्र) जिसके अर्थात विष्णु चतुरानन- चार हैं आनन जिसके अर्थात ब्रह्मा

प्रश्न 4.
‘नव गति’ में ‘नव’ गुणवाचक विशेषण है, यह गति, शब्द की विशेषता बताता है। कविता में ‘नव’ अन्य किन शब्दों के विशेषण के रूप में आया है, लिखिए।
उत्तर-
कविता में ‘नव’ शब्द ‘लय’, ‘ताल’, ‘कंठ’, ‘जलद’, ‘नभ’, ‘विहग-वृंद’, ‘पर’ और ‘स्वर’ शब्दों के विशेषण के रूप में आया है। इन शब्दों में विसर्ग कारेक हुआ है

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