Chapter 10 शतबुधि-सहस्रबुद्ध-कथा

शतबुधि-सहस्रबुद्ध-कथा

शब्दार्थाः-मत्स्यौ = दो मछलियाँ, मण्डूकेन = मेंढक से, जालहस्ताः धीवराः = हाथ में जाल लिए हुए मछुआरे, उपगताः = पहुँचे, श्वः = आने वाला कल, क्षेप्स्यामः = फेकेंगे, पलायनम् = भागना, अवष्टम्भः = रुकना, मा भैषीः = मत डरो, न भेतव्यम् = नहीं डरना चाहिए, दुष्टचेतसाम् = दुष्ट हृदय वाले, स्थास्यामि = रहूँगा, कूर्म-मण्डूक-कर्कटादयः = कछुवा, मेंढक, केकड़े आदि, निगृहीतौ = (दोनों मछलियाँ) पकड़ ली गयी, प्रलम्बमानम् = लटकते हुए, सहस्रधीः = हजार बुद्धि वाला, शिरःस्थः = सिर पर स्थित, लम्बते = लटक रहा है।

कस्मिंश्चिद् …………………………………. भेतव्यम् ।
हिन्दी अनुवाद-किसी जलाशय में शतबुद्धि और सहस्रबुद्धि ये दो मछलियाँ रहती थीं। उन दोनों की एकबुद्धि नामक मेंढक से मित्रता थी। तभी हाथ में जाल लिए मछुआरे उस जलाशय पर पहुँचे। उनमें से एक धीवर बोला, “इस जलाशय में बहुत-सी मछलियाँ हैं; अत: उनको लेने के लिए कल यहाँ जाल डालेंगे। यह सुनकर मछलियाँ दुखी हुईं। उनसे मेंढक बोला, “अरे शतबुद्धि! आपने मछुआरे की बात सुनी? अब क्या करना चाहिए? पलायन करना चाहिए।” सहस्रबुद्धि बोली, “मित्र! डरो मत। केवल बात सुनने से डरना नहीं चाहिए।

सर्पाणां …………………………………. त्यान्यम् ।
हिन्दी अनुवाद-इस जगत् में व्याप्त सर्पो, खलों और दुष्ट चित्त वालों के अभिप्राय पूरे नहीं होते। शतबुद्धि ने भी कहा, तुम ठीक कहते हो। तुम सहस्रबुद्धि हो। तुम्हारे समान बुद्धि किसी की भी नहीं है। वचन मात्र से अपना जन्मस्थान नहीं छोड़ना चाहिए।

अहं त्वां………………………………………… विमले जले ।
हिन्दी अनुवाद-मैं अच्छी बुद्धि के प्रभाव से तुम्हारी रक्षा करूंगा। मेंढक बोला “अरे, मेरी और . तुम्हारी एक बुद्धि है। मैं तो अब यहाँ नहीं रहूँगा। दूसरे जलाशय को जाऊँगा। ऐसा कहकर वह दूसरे जलाशय को चला गया। इसके बाद सवेरे मछुआरों ने आकर बीच में जाल डालकर मछली-कछुवा-मेंढक केकड़े आदि को पकड़ लिया। शत्बुद्धि और सहस्रबुद्धि मछलियाँ भी पकड़ी गईं। दोपहर बाद सुख से जाते हुए मछुआरों में से एक के कंधे पर पड़ी शतबुधि और दूसरे के हाथ में लटकती हुए सहस्रबुद्धि को देखकर मेंढक ने अपनी पत्नी से कहा।

शतबुद्धि सिर पर है और सहस्रबुद्धि लटक रहा है। हे भद्रे! मैं एकबुद्धि निर्मल जल में खेल रहा हूँ। (पंचतन्त्र से)

अभ्यासः

प्रश्न 1.
उच्चारणं कुरुते पुस्तिकायां च लिखत–
उत्तर
नोट-विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2.
एकपदेन उत्तरते
(क) शतबुद्धिः सहस्रबुद्धिश्च कुत्र निवसतः स्म?
उत्तर
जलाशये।

(ख) जालहस्ताः धीवराः कम् उपगताः?
उत्तर
जलाशयम्।

(ग) कस्य एका बुद्धिरासीत्? ।
उत्तर
मण्डूकस्य।

(घ) जलाशये बहवः के सन्ति?
उत्तर
मत्स्याः

प्रश्न 3.
कः उक्तवान् इति लिखत (लिखकर)-(मण्डूकः/शतबुधिः/सहस्रबुधिः/धीवरः)
उत्तर
(क) एतस्मिन् जलाशये बहवः मत्स्याः सन्ति। धीवरः
(ख) केवलं वचन-श्रवणादेव न भेतव्यम्। सहस्रबुधि
(ग) त्वं सहस्रबुधिः असि। शतबुधि
(घ) भोः! मम तु एका एव बुधिः मण्डूकः

प्रश्न 4.
मजूषातः क्रियापदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत (पूरा करके)
उत्तर
(क) द्वौ मत्स्यौ निवसतःस्म।
(ख) एको धीवरः अवदत्।
(ग) श्वोऽत्र जालं क्षेप्स्यामः।
(घ) तव सदृशी बुधिः कस्यापि नास्ति।
(ङ) अहं त्वां सुबुद्धिप्रभावेण रक्षयिष्यामि।

प्रश्न 5.
हिन्दीभाषायाम् अनुवादं कुरुत
(क) तच्छुत्वा मत्स्याः दु:खिनोऽभवन्।
उत्तर
अनुवाद-यह सुनकर मछलियाँ दुखी हो गईं।

(ख) अहं त्वां सुबुद्धिप्रभावेण रक्षयिष्यामि।
उत्तर
अनुवाद-मैं सुबुद्धि के प्रभाव से तुम्हारी रक्षा करूंगा।

(ग) अहं तु अत्र न स्थास्यामि।
उत्तर
अनुवाद-मैं यहाँ नहीं ठहरूँगा।

(घ) मण्डूकः स्वपत्नीम् अकथयत्।
उत्तर
अनुवाद-मेंढक ने अपनी पत्नी से कहा।

प्रश्न 6.
‘समासविग्रहं कृत्वा समासस्य नाम लिखत- (लिखकर)
उत्तर

प्रश्न 7.
निम्नलिखित-पदानां विभक्ति वचनं च लिखत (लिखकर )-
उत्तर

• नोट – विद्यार्थी शिक्षण-सङ्केत’ और एतदपि जानीत स्वयं करें।

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