Chapter 11 अशोक महान (महान व्यक्तिव)

पाठ का सारांश

अशोक महान का नाम भारत के इतिहास में दयालुता और करुणा के लिए विशेष प्रसिद्ध है। अशोक ने कलिंग पर विजय प्राप्त कर उसे अपने अधीन कर लिया। इस युद्ध में लगभग एक लाख लोग मारे गए। अशोक ने मारे गए सिपाहियों, रोती-बिलखती स्त्रियों तथा बच्चों को देखा। इन सबको देखकर उसका हृदय द्रवित हो उठा; तब उसने निर्णय किया कि अब मैं कभी तलवार नहीं उठाऊँगा।

अशोक प्रजा को अपनी सन्तान के समान समझता था। वह दीन-दुखियों,.वृद्धों और अपाहिजों को ध्यान रखता था। सभी से प्रेमपूर्ण व्यवहार करता था। उसने राज्य के अधिकारियों को आदेश दे रखा था कि प्रजा की सुरक्षा का सदैव ध्यान रखें।

अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी था, किंतु सभी धर्मों का आदर करता था। वह दयालुता का व्यवहार करता था। उसने बौद्ध धर्म का प्रचार किया। धर्म प्रचार के लिए उसने साम्राज्य के सुदूर भागों में धर्म प्रचारकों को भेजा। उसने बौद्ध धर्म का प्रचार विदेशों में भी किया। उसने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को भी धर्म के प्रचार के लिए भेजा। अशोक ने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों तथा उपदेशों को शिलाओं, स्तम्भों और गुफाओं में अंकित कराया। उसने गौतम बुद्ध के जन्म स्थान लुंबिनी वने में भी एक लाट लगवाई। हमारे राष्ट्रध्वज के मध्य का चक्र सारनाथ के अशोक स्तम्भ से ही लिया गया है। भारतीय शासकों में अशोक का स्थान बहुत ऊँचा है।

अभ्यास

प्रश्न 1.
सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद युद्ध न करने का निश्चय क्यों किया?
उत्तर :
कलिंग के युद्ध में अशोक ने मारे गए सिपाहियों, रोती-बिलखती स्त्रियों और बच्चों को देखा। इससे उसका हृदय द्रवित हो उठा और उसने भविष्य में युद्ध न करने का निश्चय किया।

प्रश्न 2.
अशोक को जीत क्यों महँगी पड़ी?
उत्तर :
अशोक कलिंग की जनता पर अपनी प्रशासन क्षमता का प्रभाव छोड़ना चाहता था, लेकिन विजय के पश्चात् उसे केवल शवों के ढेर और पीड़ित अबलाओं, मासूमों, घायलों आदि का आर्तनाद मिला। इस आधार पर उसे जीत महँगी पड़ी।

प्रश्न 3.
अशोक के संदेशों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :

  1. अशोक ने मनुष्यों को सदाचार की शिक्षा दी। उसने प्रजा को प्रेम, मृदुलता एवं दयालुता के उपदेश दिए।
  2. पशुओं पर दया करो। पशु की हत्या कभी मत करो।
  3. अशोक ने अहिंसा एवं सत्य पर बल दिया। 
  4. मनुष्यों को बड़ों का आदर तथा छोटों पर दया करनी चाहिए और सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए।

प्रश्न 4.
अशोक ने बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों और उपदेशों को जनमानस तक कैसे पहुँचाया?
उत्तर :
अशोक ने शिलालेखों, स्तम्भलेखों, स्तूपों, लाटों, प्रचारकों, प्रतिनिधियों आदि के द्वारा बौद्ध धर्म के सिद्धांत और उपदेश जनमानस तक पहुँचाए।

प्रश्न 5.
अशोक को युग पुरुष कहना क्यों उचित है?
उत्तर :
प्राचीन भारत के शासकों में अशोक का स्थान बहुत ऊँचा है। अशोक के कार्य अपनी पीढ़ी और युग से आगे थे। इसलिए अशोक को युग पुरुष कहना उचित है।

प्रश्न 6.
सही तथ्यों के सामने सही (✓) तथा गलत के सामने गलत (✗) को निशाने लगाएँ (निशान लगाकर) –

(क) अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद कभी युद्ध न करने का निर्णय लिया। (✓)
(ख) अशोक बौद्ध थे, वे सभी धर्मों का आदर नहीं करते थे। (✗)
(ग) अशोक ने सिंहल द्वीप, चीन, जापान आदि देशों में प्रचारक भेजे थे। (✓)
(घ) हमारे राष्ट्र ध्वज के मध्य का चक्र सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है। (✓)

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