Chapter 14 कर्मवीर

समस्त पद्याथों की व्याख्या

देख कर बाधा ………………………………………………. मिले फूले फले।।

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘मंजरी-8’ के ‘कर्मवीर’ नामक कविता से ली गई हैं। इस कविता के लेखक अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं।

प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने कर्मवीर अर्थात कर्मठ लोगों की प्रशंसा करते हुए उनके गुणों को बताया है।

व्याख्यो – कवि कहता है कि जो कर्मठ लोग होते हैं वे किसी भी बाधा से घबराते नहीं हैं। वे भाग्य के भरोसे बैठकर दुख नहीं भोगते और पछताते भी नहीं हैं। उनके लिए कोई भी काम कठिन नहीं होता और वे अपनी योग्यता का दिखावा भी नहीं करते। वे अपनी लगन और मेहनत से अपनी किसी भी परेशानी को दूर कर सकते हैं। साथ ही ऐसे लोग सदैव ही सुखी रहते हैं।

कर्मवीर कविता के प्रश्न उत्तर आज करना है ………………………………………………. जिसे सकते नहीं।

संदर्भ एवं प्रसंग – पूर्ववत्।।

व्याख्या – कवि कहता है कि ऐसे लोग किसी भी काम को कल के लिए नहीं छोड़ते और जो एक बार सोच लेते हैं उसे करके ही दम लेते हैं। ऐसे लोग कभी अहंकार नहीं करते और सबकी सलाह को सुनते हैं। ऐसे लोग किसी भी काम के लिए कभी दूसरे का मुँह नहीं ताकते और ऐसा कोई काम नहीं है जिसे कर्मठ व्यक्ति कर नहीं सकता।

कर्मवीर कविता का प्रश्न उत्तर जो कभी अपने ………………………………………………. औरों के लिए।

संदर्भ एवं प्रसंग – पूर्ववत्।।

व्याख्या – कवि कहता है कि ऐसे लोग अपना समय व्यर्थ बातों में नहीं गंवाते और किसी काम को कल पर नहीं छोड़ते तथा परिश्रम करने से कभी जी भी नहीं चुराते। अर्थात उनके लिए कोई भी काम कठिन नहीं होता। ऐसे लोग अपनी कार्य-कुशलता के दम पर दूसरों के लिए उदाहरण बन जाते हैं।

व्योम को छूते ………………………………………………. रहती है कहीं।

संदर्भ एवं प्रसंग – पूर्ववत्।

व्याख्या – कवि कहता है कि चाहे आकाश को छूता हुआ पर्वत शिखर हो, या घना अंधेरी जंगल हो यो उफनती लहर हो या भयानक अग्नि की ज्वाला हो, कुछ भी इनको भयभीत नहीं कर सकती। अर्थात ऐसे लोगों की राह में कैसी भी रूकावट आए तो ये कभी घबराते नहीं और ये अपनी मंजिल पर पहुँच कर ही दम लेते हैं। इस कविता के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि भारत के समस्त नागरिक कर्मवीर बनें और अपने देश की शान बढ़ाएँ।

प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को- नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।
विचार और कल्पना

प्रश्न 1.
जीवन में किसी कार्य की सफलता के लिए क्या-क्या आवश्यक है इस बिन्दु पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
वन में किसी भी कार्य की सफलता के लिए सच्ची लगन, कार्य के प्रति पूरी निष्ठा । और समर्पण अति आवश्यक है।

प्रश्न 2.
नोट-विद्यार्थी स्वयं करें।

कविता से

प्रश्न 1.
कविता में कवि ने किसकी प्रशंसा की है ?
उत्तर :
इस कविता में कवि ने मेहनती जुझारू और लगनशील व्यक्ति की प्रशंसा की है।

प्रश्न 2.
कर्मवीर देख मिलने पर भी क्यों नहीं पछताते ?
उत्तर :
क्योंकि कर्मवीर इसके बारे में सोचता ही नहीं, न ही इन बातों के बारे में सोचने के लिए उसके पास समय होता है। उसका पूरा ध्यान अपने काम पर और उसकी नजर अपनी मंजिल पर होती है।

प्रश्न 3.
“सब जगह सब काल में फूलने-फलने से” कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
कवि का तात्पर्य यह है कि कर्मवीर या कर्मठ व्यक्ति हर संमय और हर स्थान पर सफलता प्राप्त करता है।

प्रश्न 4.
कर्मवीर दूसरों के लिए किस प्रकार नमूना बन जाते हैं ?
उत्तर:
कर्मवीर व्यक्ति अपनी मेहनत, लगन और सफलता से औरों के लिए उदाहरण बन जाती है। और सभी उसकी मिशाल देते हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए
(क) रह भरोसे भाग्य के दुख भोग पछताते नहीं।।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति में कवि का आशय यह है कि कर्मवीर व्यक्ति भाग्य के भरोसे कभी नहीं बैठते और न ही कभी उन्हें दुख होता है और न ही वे कभी असफल होते हैं और न ही भी पछताते हैं।

(ख)
काम करने की जगह बातें बनाते हैं नहीं।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि कर्मवीर या कर्मठ व्यक्ति काम के समय कभी गप्पे नहीं करता अर्थात वे अपने कीमती समय को कभी व्यर्थ में नहीं आँवाता उसके लिए हर क्षण कीमती होता है और वह समय के हर क्षण का सदुपयोग करता है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
दिए गए शब्द स्त्रीलिंग हैं या पुल्लिंग? लिखिए
उत्तर :

प्रश्न 2.
कुछ शब्द उपसर्ग और प्रत्यय दोनों के योग से बनते हैं।
जैसे क् + अधीन + ता = पराधीनता
आप भी इस प्रकार के शब्द बनाइए
उत्तर :

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