Chapter 14 भविष्य का भय (मंजरी)

महत्वपूर्ण गद्यांश की व्याख्या

पर माँ इस भयंकर ……………………………. नहीं करना।

संदर्भ:
प्रस्तुत गद्य खण्ड हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मंजरी’ के ‘भविष्य का भय’ नामक पाठ से लिया गया है। इसकी लेखिका आशापूर्णा देवी हैं।

प्रसंग:
प्रस्तुत कहानी में साधन सम्पन्न परिवार की एक लड़की के माध्यम से लेखिका द्वारा निर्धन और असहाय बच्चों के प्रति संवेदना जागृत करने की चेष्टा की गई है।

व्याख्या:
तुलतुल अपने माता-पिता को छोटे बच्चों से काम कराने के कारण उन्हें पापी कहती है। माँ ने इस भयंकर सत्य को सुनकर उससे हँसकर कहा कि वह इस पापी संसार में पैदा हुई हैं और इस कारण पापी बनकर जीवन गुजारना पड़  रहा है। वह नए सिरे से संसार को नहीं बदल सकती है। वह अपनी लड़की को बड़े होकर अपने मित्रों के साथ मिलकर नया संसार. बनाकर इसको पापमुक्त करने को कहती हैं।

पाठ का सर (सारांश)

अन्तरराष्ट्रीय बाल वर्ष में तुलतुल ने छोटी टुनी की माँ से कहा कि यह साल छोटे लड़के-लड़कियों का है। उनकी ज्यादा देखभाल करनी होगी। टुनी की माँ ने टुनी से जल्दी-जल्दी बरतन धोने को कहा। तुलतुल ने टुनी को खबरदार किया क्योंकि  उसकी माँ खाक नहीं समझी। तुलतुल की मिस ने कहा है- दुनिया में सभी आदमी बराबर है। सभी छोटे बच्चों को प्यार पाने और देखभाल किए जाने का अधिकार है। “तुलतुल नहीं समझ पा रही थी कि दुबली-पतली टुनी ठण्डे पानी से बरतन धोए और तुलतुल गर्म पानी से मुँह धोकर गरम कपड़े पहनकर गरम-गरम पूरियाँ खाए।
टुनी को काम करते देख तुलतुल ने उसके हाथ से कोयला तोड़ने का लोहे का हथौडा छीन लिया और बोली, “कल से टुनी यह गन्दा काम नहीं करेगी। कल पापा टुनी को स्कूल में दाखिल करवा देंगे। पापा ने टुनी को दाखिल करवाने की बात कही और बताया कि स्कूल में फीस नहीं लगती, कॉपी-किताब मुफ्त मिलते हैं और टिफिन में खाना भी मुफ्त। तुलतुल यह सुनकर खुश हो गई।
दूसरे दिन तुलतुल ने कपड़े देकर टुनी को पहनने का हुक्म दिया और बोली, “पापा के बाजार से लौटने पर स्कूल जाएँगे। समझी, और उसके पहले मेरे साथ खाना खाएगी। याद रहेगा? खाते समय तुलतुल ने चिल्लाकर टुनी को पुकारा। दादी ने बताया  कि टुनी की माँ बरतन छोड़कर टुनी को लेकर घर पूछने गई है। शाम को तुलतुल को यह सुनना पड़ा कि टुनी की माँ ने तुलतुल की हरकतों से तंग आकर काम छोड़ दिया है।
एक बार तुलतुल जलपाईगुड़ी नाना के यहाँ गई थी। नाना द्वारा दी गई ‘दया के सागर, विद्यासागर नामक पुस्तक से प्राप्त शिक्षा ग्रहण करते हुए तुलतुल ने एक गरीब लड़के को शीत से बचाने के लिए अपना कीमती कार्डिगन दे दिया था, क्योंकि विद्यासागर भी अपने शरीर से उतारकर कपड़े गरीबों को देते थे। नाना ने तुलतुल को डाँटा था। तुलतुल समझ नहीं पा रही थी कि बड़े लोग बोलते कुछ हैं और करते कुछ हैं। उनके काम बड़े उलटे किस्म के हैं।
तुलतुल को भैया ने खाना खाने बुलाया। उसने मना कर दिया। पापा ने उससे पूछा कि टुनी स्कूल जाएगी तो उसकी माँ का गुजारा कैसे होगा। तुलतुल झटककर बोली, “छोटे बच्चों से काम कराना बड़ा पाप है तुम सब पापी हो।” माँ ने समझाया कि जब बड़ी हो जाए तो वह और उसके दोस्त मिलकर ऐसा पाप न करें।. तुलतुल माँ से लिपटकर रोकर बोली, “ अगर बड़ी होकर मैं तुम जैसी हो जाऊँ और भूल जाऊँ कि सभी लोग एक समान हैं।”

प्रश्न-अभ्यास

  • कुछ करने को            नोट– विद्यार्थी स्वयं करें।
  • विचार और कल्पना     नोट- विद्यार्थी स्वयं करें।
  • कहानी से

प्रश्न 1:
स्कूल से लौटने पर तुलतुल मुँह  फुलाकर क्यों बैठ गयी?
उत्तर:
स्कूल से आकर तुलतूल मुँह फुलाकर बैठ गई, क्योंकि ट्रेनी की माँ घर काम करने नहीं आई।

प्रश्न 2:
तुलतुल की माँ ने उसे घरेलू कार्य करने का आदेश क्यों दिया?
उत्तर:
तुलतुल की हरकतों से तंग आकर टुनी  की माँ काम करने नहीं आई। इस कारण उस काम को तुलतुल को दण्डस्वरूप करना था।

प्रश्न 3:
ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की जीवनी पढ़ने का तुलतुल पर क्या असर हुआ?
उत्तर:
ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की जीवनी पढ़कर उनके विचारों से प्रभावित होकर तुलतुल ने अपना कीमती कार्डीगन एक गरीब लड़के को शीत से बचने के लिए दे दिया।

प्रश्न 4:
तुलतूल के मन में भविष्य के किस भय की चिन्ता थी?
उत्तर:
तुलतुल भविष्य में पापरहित संसार को रचना चाहती थी।  परन्तु उसे यह भय था कि कहीं वह माँ की तरह उलट-पलट न हो जाए, बेवकूफ न बन जाए और भूल न जाए कि सभी लोग एक समान हैं।

प्रश्न 5:
टुनी की माँ टुनी को स्कूल क्यों नहीं भेजना चाहती थी और वह तुलतुल के घर की नौकरी छोड़कर क्यों चली गयी?
उत्तर:
टुनी की माँ टुनी से अपना घरेलू कामकाज कराती थी।  इसलिए वह उसे स्कूल नहीं भेजना चाहती थी। तुलतुल द्वारा टुनी को स्कूल में दाखिला कराकर टुनी की माँ का गुजारा मुश्किल था। इसलिए वह तुलतुल के घर की नौकरी छोड़कर चली गई।

प्रश्न 6:
अन्तरराष्ट्रीय बालवर्ष’ के सन्दर्भ में ‘मिस’ के क्या विचार थे और ‘मिस’ के विचारों का तुलतुल पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
अन्तरराष्ट्रीय बालवर्ष के संदर्भ में मिस के विचार थे कि दुनिया में सभी लोग समान हैं। सभी छोटे बच्चों को प्यार पाने और देखभाल किए जाने का अधिकार है। तुलतुल पर मिस के विचारों का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। वह घर में काम करने वाली स्त्री की बच्ची टुनी की देखभाल और शिक्षा के  विषय में सोचने लगी।

भाषा की बात

प्रश्न 1:
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर अपने वाक्यों में उनका प्रयोग कीजिए
मुँह फुलाना, हाथ बँटाना, मजा चखाना, सर पर भूत सवार होना, कोई चारा न होना, दिमाग फिरना, पेट में चूहे कूदना।।
उत्तर:
मुँह फुलाना (गुस्सा होना)- लड़की ने खाना नहीं खाया क्योंकि वह मुँह फुलाए बैठी थी।
हाथ बँटाना (मदद करना)- बच्चे घर के काम में परिवार का हाथ बँटाते हैं।
मजा चखाना (दण्ड देना, किए का फल चखाना)- शैतान बच्चों को बाग से आम तोड़ते देख माली ने उन्हें मजा चखा दिया।
सर पर भूत सवार होना (बुद्धि ठीक न होना)- माँ ने कहा, “तुलतुल बकबक बन्द करो। तुम्हारे सर पर भूत सवार हुआ है।”
कोई चारा न होना (कोई उपाय न होना)- काम छोड़कर चले जाने के अलावा टुनी की माँ के पास कोई चारा न था।
दिमाग फिरना ( बुद्धि ठिकाने न होना)- तुलतुल का दिमाग फिर गया,  जिससे वह टुनी को जबरदस्ती स्कूल में प्रवेश दिलाना चाहती थी।
पेट में चूहे कूदना ( भूखा होना)- देर तक खाना न मिलने पर पेट में चूहे कूदने लगे।

प्रश्न 2:
इस पाठ में कई शब्द-युग्म आये हैं जो पुनरुक्त हैं, जैसे- कभी-कभी, डरी-डरी, गरम-गरम आदि। पाठ में आये हुए अन्य पुनरुक्त शब्दों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर:
छोटे-छोटे, अच्छी-अच्छा, जल्दी-जल्दी, कभी-कभी, बक-बक, तार-तार, थोड़ी-थोड़ी, क्या-क्या, हो-हो।

प्रश्न 3:
इस पाठ में आये निम्नलिखित शब्दों को पढ़िएयूनिफार्म, फ्रॉक, हुक्म, माफ। ये शब्द विदेशी भाषा से हिन्दी में आये हैं। पाठ से अन्य विदेशी शब्द चुनकर लिखिए।
उत्तर:
यूनिफार्म, मिस, डिपो, टिफिन, डेंजरस, कार्डीगन। 

प्रश्न 4:
पदों के मेल से बने हुए नये संक्षिप्त पद को ‘समास’ कहते हैं। जिस ‘समास’ में दोनों पद प्रधान होते हैं और उनके बीच में ‘और’ शब्द का लोप होता है, उसे ‘द्वन्द्व समास’ कहते हैं, जैसे- पढ़ना-लिखना अर्थात् पढ़ना और लिखना। नीचे लिखे शब्दों में समास विग्रह कीजिए झाडू-पोंछा, दुबली-पतली, हाथ-मुँह, लड़के-लड़कियाँ।
उत्तर:
झाडू-पोंछा।                                         झाड़ और पोंछा                               द्वन्द्व समास
दुबली-पतली                                       दुबली और पतली                             द्वन्द्व समास
हाथ-मुँह                                                हाथ और मुँह                                 द्वन्द्व समास
लड़के-लड़कियाँ                                 लड़के और लड़कियाँ                        द्वन्द्व समास

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