Chapter 16 अमोघं तद् बलिदानम्

अमोघं तद् बलिदानम्

शब्दार्था:– अवैधरूपेण = गैर कानूनी रूप से, निरसनाय = हटाने के लिए. अतिक्रमणम् = सीमा से आगे बढ़ जाना, प्रेषणम् = भेजना, स्वशौर्येण = अपने शौर्य से, शत्रुहस्तगतानि = शत्रु के हाथ में गये हुए, आत्मरक्षणे = अपनी रक्षा में, पणीकृत्य = दाँव लगा कर, आमोघम् = सफल।

जम्मू-कश्मीर राज्यस्व ………………………………वशीकृतवन्तः इति।
हिन्दी अनुवाद-जम्मू-कश्मीर राज्य के कारगिल क्षेत्र में सन् 2००० में मई मास से भारतीय सेना युद्ध कर रही थी। देश के उस भाग में (अवैध रूप में) अन्दर घुसने और अतिक्रमण करने वालों को रोकने के लिए (हमारे द्वारा) वह प्रयत्न किया जा रहा था।

भारत के इस भूभाग में ऐसा अतिक्रमण बहुत समय पहले से ही व्यवस्थित रीति से सोच-विचारकर शत्रुओं द्वारा आरम्भ था, ऐसा उस समय मालूम हुआ; जब जनवरी मास में ही भारतीय गुप्तचर विभाग द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य के कारगिल में स्थित सीमा में नियन्त्रण रेखा के पास पाकिस्तान का कोई विमान देखा गया था; परन्तु उस विषय में (उस समय तक) हमारे द्वारा गम्भीरता से विचार नहीं किया गया था। इसके चार महीनों बाद पता चला कि आठ सौ से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों और अफगानिस्तान के आतंकवादियों ने अतिक्रमण करके कारगिल, मष्कोह और द्रास में निर्जन पर्वत प्रदेशों पर अधिकार कर लिया।

युद्धेधे ……………………………………….. संजय कुमारः।
हिन्दी अनुवाद-युद्ध में भारतीय सैन्य बल के द्वारा अतुलनीय पराक्रम प्रदर्शित किया गया। अपने शौर्य से शत्रु द्वारा अधिकृत नौकाएँ और सैन्य-स्थल मुक्त कराये गये। कठिन परिस्थिति में और भीषण युद्ध में भारतीय सैन्य बल को विजय प्राप्त हुई। इस वीरतापूर्ण अभियान में अनेक सैनिकों ने वीरगति प्राप्त की। सैनिकों के प्राणोत्सर्ग को नमन करके वीर सैनिक ‘परमवीर चक्र से सम्मानित किये गये। ये हैं

  1. कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय
  2. सूबेदार योगेन्द्र सिंह यादव
  3. कैप्टन विक्रम बत्रा
  4. राइफल मैन संजय कुमार

शान्तिप्रियाः ………………………………………. प्रयतनीयम्।
हिन्दी अनुवाद – भारतीय शान्तिप्रिय हैं, इसमें संदेह नहीं है; परन्तु आत्म-रक्षा में हम कभी आलसी नहीं हैं। यह प्रधानमंत्री के द्वारा और दूसरों (दूसरे व्यक्तियों) के द्वारा उद्घोषित है। हम देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों को दाँव पर लगाकर (भी) कार्य करते हैं और हम सब योद्धाओं को गौरव के साथ याद करते हैं। जिस प्रकार से उनका आत्मबलिदान व्यर्थ (बेकार) न हो (हम) सभी को वैसा प्रयत्न करना चाहिए।

अभ्यासः

प्रश्न 1.
उच्चारणं कुरुत पुस्तिकायां च लिखत
उत्तर
नोट-विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2.
एकपदेन उत्तरत
(क) कारगिलस्थलं कस्मिन् राज्ये अस्ति?
उत्तर
जम्मूकश्मीर राज्ये।

(ख) भारतीयगुप्तचरविभागीयैः कस्य देशस्य विमानं दृष्टमासीत्?
उत्तर
पाकिस्तान देशस्य।

(ग) शान्तिप्रियाः के सन्ति?
उत्तर
भारतीयः।

(घ) सगौरवं वयं कान् स्मरामः?
उत्तर
योद्धृन्।

प्रश्न 3.
एकवाक्येन उत्तरत
(क) कारगिल-युद्धं कस्मिन् वर्षे अभवत्?
उत्तर
कारगिल-युधं 2000 तमस्य वर्षे अभवत्?

(ख) पाकिस्थानस्य विमानं कुत्र दृष्टमासीत्?
उत्तर
पाकिस्थानस्य विमानं कारगिल वलये दृष्टमासीत्।

(ग) आरम्भे पाकिस्थानं किं न अङ्ग्यकरोत्?
उत्तर
आरम्भे पाकिस्थानं एतत् न अङ्ग्यकरोत् यत् ते तदीयाः सैनिकाः।

(घ) केषाम् आत्मबलिदानं व्यर्थं न भवेत्? ।
उत्तर
भारतीय सैनिकानाम् आत्मबलिदानं व्यर्थं न भवेत्।

प्रश्न 4.
रेखांकितपदानि अवलम्व्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (करके)
(क) भारतीयसेनायाः पाकिस्तानसेनया सह युद्धम् अभवत्।
उत्तर
कस्य सेनायाः पाकिस्तानसेनया सह युद्धम् अभवत्।।

(ख) नियन्त्रणरेखायाः समीपे पाकिस्तानस्य विमानं दृष्टमासीत्।
उत्तर
नियन्त्रणरेखायाः समीपे पाकिस्तानस्य किं दृष्टमासीत्?

(ग) शान्तिप्रियाः भारतीयाः भवन्ति।
उत्तर
शान्तिप्रियाः के भवन्ति।

(घ) सैनिकानाम् आत्मबलिदानं व्यर्थ न स्यात्।
उत्तर
केषाम् आत्मबलिदानं व्यर्थ न स्यात्।।

प्रश्न 5.
मजूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत (पूरा करके)-
उत्तर
(क) सैनिकानाम् आत्मबलिदानं व्यर्थम् न भवेत्।
(ख) परम् आत्मरक्षः वयं न कदापि अलसाः इति प्रधानमन्त्रिणा अन्यैश्च उद्घोषितम्।।
(ग) शान्तिप्रियाः भारतीयाः इत्यत्र नास्ति संशयः।

प्रश्न 6.
संस्कृते अनुवादं कुरुत (अनुवाद करके)-
उत्तर
(क) सीमाओं की रक्षा कौन करता है।
उत्तर
अनुवाद-सीमानाम् रक्षां कः करोति?

(ख) हिमालय की ऊँची चोटियाँ बर्फ से ढंकी रहती हैं।
उत्तर
अनुवाद-हिमालयस्ट उतुंगाः शिखर: हिमाच्छादिताः भवन्ति।

(ग) भारतीय शान्तिप्रिय होते हैं।
उत्तर
अनुवाद-भारतीयः शान्तिप्रियाः भवन्ति।

(घ) कारगिल युद्ध में भारत की जीत हुई।
उत्तर
अनुवाद-कारगिल युद्धे भारतं विजयी अभवत्।

प्रश्न 7.
निम्नांकितेषु पदेषु उपसर्ग चित्वा लिखत (लिखकर)-
उत्तर

• नोट – विद्यार्थी ‘स्मरणीयम् और शिक्षण-सङ्केत’ स्वयं करें।

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