Chapter 16 सूफी सन्त : निजामुद्दीन और अमीर खुसरो (महान व्यक्तिव)

पाठ का सारांश

शेख निजामुद्दीन औलिया – शेख निजामुद्दीन औलिया का जन्म 1236 ई० में बदायूँ में हुआ। पिता के मरने पर माता जुलेखा ने इनका पालन-पोषण किया। इन्होंने बदायूँ : के बाद आगे की शिक्षा दिल्ली में ग्रहण की और शीघ्र ही ये एक प्रसिद्ध विद्वान बन गए। प्रसिद्ध सूफी सन्त हजरत ख्वाजा फरीदुद्दीन ने शेख निजामुद्दीन को अपन, शिष्य बनाकर आध्यात्मिक चिंतन और साधना का रहस्य बताया। इन्होंने अजोधन से दिल्ली आकर गयासपुर में एक मठ की स्थापना की। 1265 ई० में बाबा फरीद की मृत्यु के बाद ये इनके उत्तराधिकारी बने। शेख का नाम दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों में प्रसिद्ध हो गया। इनकी खानकाह (मठ) में अच्छे कव्वाल आते। रहते थे। इनमें गरीबों के प्रति करुणा थी। खानकाहे में इनका भंडारा सभी के लिए खुला रहता था। इनकी शिष्य-मण्डली में सभी वर्गों और क्षेत्रों के लोग थे। इन्होंने जीवनभर मानव प्रेम का प्रचार किया। निजामुद्दीन औलिया अपने शिष्यों का ध्यान सदैव सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर आकृष्ट कराते रहे। 1325 ई० में इनका निधन हो गया।

मानवता के प्रति प्रेम और सेवा भावना जैसे गुणों के कारण निजामुद्दीन औलिया कों महबूब-ए-इलाही का दर्जा मिला। आज भी इनकी मजार पर लाखों लोग मन्नत माँगते और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

अमीर खुसरो – शेख निजामुद्दीन औलिया के शिष्य अमीर खुसरो को जन्म 1253 ई० में एटा के पटियाली कस्बे में हुआ। इनके पिता अमीर सैफुद्दीन महमूद प्रकृति, कला और काव्य के प्रेमी थे। अमीर खुसरो को खिलजी सुल्तानों ने अपने दरबार में कवि, साहित्यकार और संगीतज्ञ के रूप में सम्मान दिया। अमीर खुसरो को फारसी, हिन्दी, संस्कृत,  अरबी आदि भाषाओं का ज्ञान था। इनकी रचनाओं में भारत की जलवायु, फल-फूल और पशु-पक्षी की प्रशंसा मिलती है। खुसरो ने दिल्ली को बगदाद से अच्छा माना। भारतीय दर्शन को यूनान और रोम से श्रेष्ठ बताया।

खुसरो की मुकरियाँ और पहेलियाँ भारतीय जनता में रची-बसी हैं। हिन्दी कृतियों के कारण इन्हें जनसाधारण में विशेष लोकप्रियता प्राप्त हुई। इनकी हिन्दी रचनाओं में गीत, दोहे, पहेलियाँ और मुकरियाँ विशेष उल्लेखनीय हैं। अमीर खुसरो को भारतीय होने का गर्व था। अमीर खुसरो उच्चकोटि के संगीतज्ञ थे। इन्होंने कई रागों की रचना की। गायन में ‘खयाल’ अमीर खुसरो की देन है। इन्होंने सितार का आविष्कार किया, मृदंग को सुधारकर तबले का रूप दिया। इन पर सूफी सन्तों की मान्यता का प्रभाव था। विदेशों के फारसी कवियों में भी इनका उपयुक्त स्थान है। 1325 ई० में इनका निधन हो गया। खुसरो धर्मनिष्ठ व्यक्ति थे। धार्मिक सहिष्णुता और लोगों से मेलजोल रखने के कारण ये जनता में लोकप्रिय थे। इनका व्यक्तित्व समकालीन लोगों के मध्य अतुलनीय एवं अद्वितीय था।

अभ्यास

प्रश्न 1.
शेख निजामुद्दीन औलिया अजोधन क्यों गए?
उत्तर :
शेख निजामुद्दीन औलिया बाबा फरीद के दर्शन करने के लिए अजोधन गए।

प्रश्न 2.
बाबा फरीद के निधन के बाद शेख निजामुद्दीन औलिया को उनका उत्तराधिकारी क्यों घोषित किया गया?
उत्तर :
शेख निजामुद्दीन बाबा फरीद के प्रमुख शिष्य थे, इसलिए उन्हें बाबा फरीद का उत्तराधिकारी घोषित किया गया।

प्रश्न 3.
शेख निजामुद्दीन अपने शिष्यों का ध्यान किस ओर और क्यों आकृष्ट कराते रहे?
उत्तर :
शेख निजामुद्दीन अपने शिष्यों का ध्यान सदैव सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर आकृष्ट कराते रहे, क्योंकि वे सामाजिक समन्वय और मेल-जोल की भावना का विकास चाहते थे।

प्रश्न 4.
अमीर खुसरो को किन-किन भाषाओं का ज्ञान था?
उत्तर :
अमीर खुसरो को फारसी, अरबी, हिन्दी और संस्कृत भाषाओं का ज्ञान था।

प्रश्न 5.
अमीर खुसरो का संगीत के क्षेत्र में क्या योगदान रहा है?
उत्तर :
गायन में ‘खयाल’, सितार का आविष्कार और मृदंग को तबले का रूप देकर अमीर खुसरो ने संगीत के क्षेत्र में अमूल्य योगदान किया है।

प्रश्न 6.
अमीर खुसरो जनसाधारण में क्यों प्रसिद्ध थे?
उत्तर :
धार्मिक सहिष्णुता और लोगों से मेल-जोल के कारण अमीर खुसरो जनसाधारण में प्रसिद्ध थे। उनका व्यक्तित्व अतुलनीय और अद्वितीय था।

प्रश्न 7.
सही वाक्य पर सही (✓) और गलत वाक्य पर (✗) का चिह्न लगाइए(चिह्न लगाकर) –

(क) अमीर खुसरो ने हिन्दू-मुस्लिम समाज और संस्कृति के बीच समन्वय को मार्ग प्रशस्त किया। (✓)
(ख) अमीर खुसरो ने गयासपुर नामक स्थान पर एक मठ की स्थापना की। (✗)
(ग) शेख निजामुद्दीन औलिया को बाबा फरीद के निधन के बाद उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया। (✓)
(घ) बदायूं में शिक्षा प्राप्त करने के बाद अमीर खुसरो दिल्ली चले गए। (✗)
(ङ) शेख निजामुद्दीन ने अपनी कविताओं में भारत की सराहना की है। (✗)
(च) अमीर खुसरो ने वीणा और तम्बूरा के संयोग से सितार का आविष्कार किया। (✓)

प्रश्न 8.
भाव स्पष्ट कीजिए (भाव स्पष्ट करके) –
गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस। चल खुसरो घर आपने, रैन भई चहँ देस।
उत्तर :
यह संसार क्षण भंगुर है। जो प्रिय होता है, वह भी रूठ (मर) जाता है। यहाँ चारों ओर मोह-माया के अँधेरे के सिवाय और कुछ नहीं। ऐ खुसरो! ईश्वर के घर चल।।

प्रश्न 9.
एवं 10. नोट – विद्यार्थी अपने शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से स्वयं करें। योग्यता विस्तार –

  • पता करके लिखिए कि अमीर खुसरो हज़रत निजामुद्दीन औलिया के सबसे प्रिय शिष्य कैसे बने?
  • अमीर खुसरो को अपने भारतीय होने पर क्यों गर्व था?

नोट – विद्यार्थी स्वयं करें।

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