Chapter 2 पंचलाइट

पंचलाइट – पाठ का सारांश/कथावस्तु

(2018, 17, 15, 14, 12)

पेट्रोमैक्स यानी पंचलैट की खरीददारी
गाँव में रहने वाली विभिन्न जातियाँ अपनी अलग-अलग टोली बनाकर रहती हैं। उन्हीं में से महतो टोली के पंचों ने पिछले 15 महीने से दण्ड–जुर्माने के द्वारा अमा पैसों से रामनवमी के मेले से इस बार पेट्रोमैक्स खरीदा। पेट्रोमैक्स खरीदने के बाद बचे र 10 रुपये से पूजा की सामग्री खरीदी गई। पेट्रोमैक्स यानी पंचलैट को देखने के लिए टोले के सभी बालक, औरतें एवं मर्द इकट्ठे हो गए और सरदार ने अपनी पत्नी को आदेश दिया कि वह, इसके पूजा-पाठ का प्रबन्ध करे।

पंचलैट को जलाने की समस्या
महतो टोली के सभी जन ‘पंचलैट’ के आने से अत्यधिक उत्साहित हैं, लेकिन उनके सामने एक बड़ी समस्या यह आ गई कि पंचलैट जलाएगा कौन? क्योंकि किसी भी व्यक्ति को उसे जलाना नहीं आता था। महतो टोली के किसी भी घर में अभी तक ढिबरी नहीं जलाई गई थी, क्योंकि सभी पंचलैट की रौशनी को ही सभी ओर फैली हुआ देखना चाहते थे। पंचलैट के न जलने से पंचों के चेहरे उतर गए। राजपूत टोली के लोग उनका मज़ाक बनाने लगे, जिसे सबने धैर्यपूर्वक सहन किया। इसके बावजूद पंचों ने तय किया कि दूसरी टोली के व्यक्ति की मदद से पंचलैट नहीं जलाया जाएगा, चाहे वह बिना जले ही पड़ा रहे।

टोली द्वारा दी गई सजा भुगत रहे गोधन की खोज
गुलरी काकी की बेटी मुनरी गोधन से प्रेम करती थी और उसे पता था कि गोधन को पंचलैट जलाना आता है, लेकिन पंचायत ने गोधन का हुक्का पानी बन्द कर रखा था। मुनरी ने अपनी सहेली कनेली को और कनेली ने यह सूचना सरदार तक पहुँचा दी कि गोधन ‘पंचलैट’ जलाना जानता है। सभी पंचों ने सोच विचार कर अन्त में निर्णय लिया कि गोधन को बुलाकर उसी से ‘पंचलैट’ जलवाया जाए।

गोधन द्वारा पंचलैट जलाना
सरदार द्वारा भेजे गए छड़ीदार के कहने से नहीं आने पर गोधन को मनाने गुलरी काकी गई। तब गोधन ने आकर ‘पंचलैट’ में तेल भरा और जलाने के लिए ‘स्पिरिट’ माँगा। ‘स्पिरिट’ के अभाव में उसने गरी (नारियल के तेल से ही पंचलैट जला दिया। पंचलैट के जलते ही टोली के सभी सदस्यों में खुशी की लहर दौड़ गई। कीर्तनिया लोगों ने एक स्वर में महावीर स्वामी की जय ध्वनि की और कीर्तन शुरू हो गया।

पंचों द्वारा गोधन को माफ़ करना
गोधन ने जिस होशियारी से ‘पंचलैट’ को जला दिया था, उससे सभी प्रभावित हुए थे। गोधन के प्रति सभी लोगों के दिल का मैल दूर हो गया। गोधन ने सभी का दिल जीत लिया। मुनरी ने बड़ी हसरत भरी निगाहों से गोधन को देखा। सरदार ने गोधन को बड़े प्यार से अपने पास बुलाकर कहा कि-“तुमने जाति की इज्जत रखी है। तुम्हारा सात खून माफ है। खूब गाओं सलीमा का गाना।” अन्त में गुलरी काकी ने गोधन को रात के खाने पर निमन्त्रित किया। गौधन ने एक बार फिर से मुनरी की ओर देखा और नज़र मिलते ही लज्जा से मुनरी की पलकें झुक गई।

‘पंचलाइट’ कहानी की समीक्षा

(2018, 17, 13, 12, 11)

ग्रामीण क्षेत्र के जीवन से सम्बन्धित प्रस्तुत कहानी से गाँव की रूढ़िवादिता, सरलता एवं अज्ञानता के बारे में स्पष्ट संकेत मिलता है। ‘पंचलाइट’ फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ की आंचलिक कहानी है। यह कहानी ग्रामीण जीवन पर आधारित है। इसमें ऑचलिक परिवेश के आधार पर पात्रों का चित्रण किया गया हैं। इसकी समीक्षा इस प्रकार है

कथानक
प्रस्तुत कहानी में फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ ने पैट्रोमैक्स (जिसे गाँव वाले ‘पंचलाइट’ कहते हैं) के माध्यम से ग्रामवासियों की मनोस्थिति की वास्तविक झलक प्रस्तुत की है। यह कहानी घटनाप्रधान है, जिसमें बताया गया है कि आवश्यकता किस प्रकार मनुष्य के बड़े से बड़े दिग। संस्कार तथा निषेध को भी अनावश्यक सिद्ध कर देती है, जैसा गोधन के साथ हुआ। महतो टोली के पंच पेट्रोमैक्स खरीद तो लाते हैं, किन्तु उसे जलाना नहीं जानते। उनके लिए यह अपमान की बात हो जाती है कि उनका ‘पंचलाइट’ पहली बार किसी दूसरी टोली के सदस्यों द्वारा जलाया जाए। इस समस्या को समाधान मुनरी बताती है, क्योंकि उसका प्रेमी गौधन ‘पंचलाइट जलाना जानता है।

‘पंचायत’ ने गौधन का हुक्का-पानी बन्द कर रखा है, किन्तु जाति की प्रतिष्ठा को बचाए रखने के लिए गोधन को पंचायत में आने की अनुमति दे दी जाती हैं। वह ‘पंचलाइट’ को स्प्रिट के अभाव में गरी (नारियल के तेल से ही जला देता है। अब गोधन पर लगे सारे प्रतिबन्ध हटा लिए जाते हैं और उसे इछानुसार स्वतन्त्र आचरण करने की भी छूट मिल जाती है।

पात्र तथा चरित्र-चित्रण
प्रस्तुत कहानी चूँकि आंचलिक कहानी है। अतः इस कहानी के केन्द्र में अंचल-विशेष या क्षेत्र विशेष हैं, कोई पात्र या चरित्र केन्द्र में नहीं है। इसके बावजूद ‘पंचलाइट’ कहानी का सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं प्रमुख पात्र गोधन है। कहानीकार ने कुछ पात्रों के चरित्रों की रेखाएँ उभारने की कोशिश की है। प्रस्तुत कहानी में सरदार, दीवान, मुनरी की माँ, गुलरी काकी, फुटंगी झा आदि एक वर्ग के पात्र हैं, जबकि गोधन, मुनरी दूसरे वर्ग के। कहानी के सभी पात्र जीवन्त प्रतीत होते हैं। उनके माध्यम से ग्रामवासियों की मनोवृत्तियों का परिचय बड़े ही यथार्थ रूप में प्राप्त होता है। लेखक को ग्रामीण समूह के चरित्र को उभारने में विशेष सफलता मिली है।

कथोपकथन या संवाद
प्रस्तुत कहानी के संवाद रोचक, सरल, स्वाभाविक और संक्षिप्त हैं। अनावश्यक संवाद नहीं हैं। संवादों के माध्यम से बिहार के ग्रामीण अंचल की भाषा का प्रयोग, संवादों की स्वाभाविकता, संवादों के माध्यम से ग्रामीण जीवन की अशिक्षा, विवादिता, अज्ञानता पर प्रकाश डालकर जीवन्त वातावरण निर्मित किया गया है। जैसे मुनरी ने चालाकी से अपनी सहेली कनेली के कान में बात डाल दी-‘कनेली। चिगों, चिव चिन …..’ कनेली मुस्कुराकर रह गई–’गोधन तो बन्द है।’ मुनरी बोली-‘तू कह तो सरदार से। गोधन जानता है ‘पंचलाइट’ बालना।’ केनेली बोली, ‘कौन, गोधन? जानता है बालना? लेकिन ….’ इस प्रकार इस कहानी के संवाद पात्र एवं परिस्थिति के अनुकूल हैं। कथाकार ने उनका चरित्र चित्रण मनोवैज्ञानिक आधार पर किया है।

देशकाल और वातावरण
रेणु जी की कहानी ग्रामीण परिवेश की आँचलिक कहानी है। इस कहानी में बिहार के ग्रामीण अंचल का चित्र प्रस्तुत किया गया है। वातावरण की सजीवता पाठकों को आकर्षित करने वाली हैं। ‘पंचलाइट’ के माध्यम से ग्रामीणों के आचार-विचार, अन्धविश्वास आदि का भी चित्रण हुआ है। यद्यपि इस कहानी में वातावरण का वर्णन नहीं किया गया है, तथापि घटनाओं और पात्रों के माध्यम से वातावरण स्वयं जीवन्त हो उठता है।

भाषा-शैली
प्रस्तुत कहानी की भाषा बिहार के ग्रामीण अंचलों में बोली जाने वाली जन भाषा है। इस भाषा में स्वाभाविकता झलकती है। गाँव के लोग शब्दों का उच्चारण अशुद्ध करते हैं। उदाहरण के रूप में, टोले की कीर्तन मण्डली के मूलगेन ने अपने भगतिया पछकों को समझाकर कहा- देखो, आज ‘पंचलैट’ की रोशनी में कीर्तन होगा। बेताले लोगों से पहले ही कह देता हैं, आज यदि आखर धरने में छेद-वेद हुआ, तो दूसरे दिन से एकदम बैंकार।” रेणुजी ने इस कहानी में व्यंग्यात्मक शैली का प्रयोग किया है। उदाहरणस्वरूप ‘एक’ नौजवान ने आकर सूचना दी–राजपूत टोली के लोग हँसते-हँसते पागल हो रहे हैं। कहते हैं, कान पकड़कर ‘पंचलैट’ के सामने पाँच बार उठो बैठो, तुरन्त जलने लगेगा।” पूरी कहानी ग्रामीणों की अज्ञानता, अशिक्षा, रूढिवादिता पर व्यंग्य करती हुई आगे बढ़ती है।

उद्देश्य
प्रस्तुत कहानी में रेणु जी ने ग्राम सुधार की प्रेरणा दी है। इसके साथ-साथ, यह भी सन्देश दिया है कि आवश्यकता बड़े-से-बड़े संस्कार और निषेध को अनावश्यक सिद्ध कर देती है। इसी केन्द्रीय भाव के आधार पर कहानी के माध्यम से एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य को स्पष्ट किया गया है। गोधन द्वारा पेट्रोमैक्स जला देने पर उसकी सब गलतियाँ माफ कर दी जाती हैं। उस पर लगे सारे प्रतिबन्ध हटा दिए जाते हैं।

शीर्षक
‘पंचलाइट’ कहानी का शीर्षक अत्यन्त संक्षिप्त और आकर्षक है। ‘पंचलाइट’ शीर्षक की दृष्टि से यह एक उच्च स्तरीय कथा है, जिसमें एक घटना के माध्यम से सामाजिक सदियों को तोड़ते हुए दिखाया गया है। पंचलाइट शीर्षक कहानी के भाव, उददेश्य और विषय-वस्तु की दृष्टि से पूर्णतः सार्थक है। सम्पूर्ण कहानी शीर्षक के इर्द-गिर्द घूमती है। इस प्रकार यह कहानी शीर्षक की दृष्टि से सफल कहानी है।

गोधन का चरित्र-चित्रण

(2018, 17, 16, 14, 13, 12, 10)

रेणुजी की आंचलिक कहानी ‘पंचलाइट’ में ग्रामवासियों की मनःस्थिति की वास्तविक झलक दिखती हैं। इस कहानी का प्रमुख पात्र गोधन हैं, जिसके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ उल्लेखनीय हैं-

युवक की स्वाभाविक प्रवृत्ति
गोधन युवा है, अतः उसके व्यक्तित्व में युवा वर्ग की कुछ स्वाभाविक प्रवृत्तियों निहित हैं। वह मनचला एवं लापरवाह युवक है। वह फिल्मी गाने गाता है। मुनरी से प्रेम करता है और बाहर से आकर बसने के बावजूद पंचों के खर्च के लिए उन्हें कुछ नहीं देता है। यह कहना अधिक उचित होगा कि वह एक अल्हड़ ग्रामीण युवा है।

गुणवान व्यक्तित्व
गोधन अशिक्षित है, लेकिन उसमें गुणों की कमी नहीं है। वह पूरे महतो टोले में एकमात्र ऐसा व्यक्ति है, जो पेट्रोमैक्स जलाना जानता है। वह अत्यन्त चतुर भी है। वह अपनी इस विशेषता को मुनरी को बता देता है, जो इसे सरदार तक पहुंचा देती है। गोधन इतना काबिल है कि वह बिना स्पिरिट के ही गरी (नारियल) के तेल से पेट्रोमैक्स जला देता है। इससे उसकी बौद्धिकता का भी पता चलता है।

स्वाभिमानी
गोधन स्वाभिमानी है, इसीलिए हुक्क-पानी बन्द करने के बाद जब छड़ीदार उसे बुलाने जाता है, तो वह आने से इनकार कर देता है। हुक्का पानी बन्द करने को अपना अपमान समझता है। जिस गुलरी काकी के कहने पर उसे सजा सुनाई गई थी, उन्हीं के मनाने पर वह ‘पंचलैट’ जलाने के लिए आता है।

अपने समाज की प्रतिष्ठा के प्रति संवेदनशील
गोधन अपने समाज की मान-प्रतिष्ठा के प्रति अत्यन्त संवेदनशील है। जिस समाज या पंचायत ने उसका हुक्का-पानी बन्द कर दिया था। उसी समाज की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए वह अपने अपमान को भूल जाता है। बिना स्पिरिट के ही पंचलैट जलाकर वह अपने समाज, जाति एवं पंचायत की मान-प्रतिष्ठा की रक्षा करता है।

निर्भीक व्यक्तित्व
गोपन का व्यक्तित्व अत्यन्त निर्भीक है। वह किसी से बिना डरे मुनरी के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त कर देता है। इस प्रकार, कहा जा सकता है कि गोधन का चरित्र ग्रामीण लड़के से मिलता-जुलता होने के साथ साथ बौद्धिकता एवं विवेकशील भी है, जो उसे आधुनिकता की ओर ले जाती है।

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