Chapter 2 बाल-प्रतिज्ञा (भविष्यत्काल विधिलिङ)

करिष्यामि …………………………………………. कुमार्गे ॥

हिन्दी अनुवाद – बुरे लोगों की संगति नहीं करूंगा। अच्छे लोगों की सत्संगति करूंगा। हमेशा सच्चे रास्ते पर पैर रखूगा। कभी बुरे रास्ते पर मैं नहीं चलूंगा।

हरिष्यामि …………………………………………. कदाचित

हिन्दी अनुवाद – मैं किसी का धन हरण नहीं करूंगा और मैं सबके चित्तों को हर लँगा सबका प्यारा बन जाऊँगा। मैं सत्य बोलूंगा, कभी भी झूठ नहीं बोलूंगा। मैं मीठा बोलूंगा, कड़वा कभी नहीं बोलूंगा।

भविष्यामि …………………………………………. वाहम् ॥

हिन्दी अनुवाद – मैं धैर्यवान होऊँगा, मैं वीर होऊँगा। मैं दानी होऊँगा, अपने देश का अभिमानी होऊँगा, मैं हमेशा उत्साहयुक्त होऊँगा और मैं कभी भी आलस्ययुक्त नहीं होऊँगा। सदा

ब्रह्मचर्य …………………………………………. करिष्ये।

हिन्दी अनुवाद – मैं सदा ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करूंगा। मैं सदा देशसेवा का व्रत धारण करूंगा। मैं सत्य, शिव और सुन्दर कार्य में अपने पैरों को पीछे नहीं करूंगा।

सदाऽहं …………………………………………. भवेयम् ॥

हिन्दी अनुवाद – मैं सदा अपने धर्म का अनुरागी बनूं। मैं सदा अपने कार्य का अनुरागी बनूं। मैं सदा स्वदेशानुरागी बनूं। मैं सदा स्ववेषानुरागी बनें।

अभ्यास

प्रश्न 1.
उच्चारण करेंनोट-विद्यार्थी स्वयं उच्चारण करें।

प्रश्न 2.
एक पद में उत्तर दें
उत्तर :
(क) कस्य सङ्गतिं न करिष्यामि?
उत्तर : दुर्जनानाम्।

(ख)
अहं सदा कुत्र पादौ धरिष्यामि?
उत्तर : सत्यमार्गे।

(ग)
अहं किं न वदिष्यामि?
उत्तर : मिथ्या।

(घ) अहं कस्य चित्तानि हरिष्यामि?
उत्तर : सर्वस्य।

(ङ) अहं किं व्रदिष्यामि?
उत्तर : सत्य।

प्रश्न 3.
कोष्ठक से उचित क्रिया-पदों को चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (पूर्ति करके)
(क) अहं सज्जनानां सत्सङ्गतिम् करिष्यामि।
(ख) अहं कस्यापि वित्तं न हरिष्यामि।
(ग) अहं सदा उत्साहयुक्तः भविष्यामि।
(घ) अहं सदा स्वधर्मानुरागी भवेयम्।

प्रश्न 4.
रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न-निर्माण करें
(क) लता कदाचित् कुमार्गे न चलिष्यति।                 प्रश्न – का कदाचित् कुमार्गे न चलिष्यति।
(ख) अहं कस्यापि वित्तानि न हरिष्यामि।                  प्रश्न – अहम् कस्यापि वित्तानि किम् न करिष्यामि?
(ग) वयं स्वदेशानुरागी भवेम।                                  प्रश्न – के स्वदेशानुरागी।

प्रश्न 5.
वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद करें अनुवाद
(क) मैं सदा सत्य बोलूंगा।
अनुवाद : अहं सदा सत्यं वदिष्यामि।

(ख)
हम सब कड़वी बात नहीं बोलेंगे।
अनुवाद : वयं तिक्तं न वदिष्यामि।


(ग)
मैं सदा देश-सेवा करूंगा।
अनुवाद : अहं सदा देशसेवाम् भवेयम्।

(घ)
मैं सदा स्वदेशानुरागी होऊँगा।
अनुवाद : अहं सदा स्वदेशानुरागी भवेयम्।

प्रश्न 6.
नीचे दिए गए चक्र को ध्यान से देखिए, बीच के गोले में कुछ क्रियापद दिए गए हैं। उचित क्रिया पदों को लेकर उसमें ऊपर दिए गए अधूरे वाक्यों को पूर्ण कीजिए (चक्र पाठ्यपुस्तक से देखकर )
(क) अहं सदा सत्यं वदिष्यामि।                     (क) अहं सदा स्वदेशानुरागी भवेयम्।
(ख) अहं सर्वदा उत्साहयुक्तः भविष्यामि।      (ख) अहं वीरः भविष्यामि।
(ग) अहम् आलस्ययुक्तः न भविष्यामि।         (ग) अहम् स्वदेशाभिमानी भवेयम्।
(घ) अहं सदा स्वकर्मानुरागी भवेयम्।            (घ) अहं सदा मधुरम् वदिष्यामि।
(ङ) अहं कस्यापि चित्तानि न हरिष्यामि।       (ङ) अहं सज्जनानाम् सत्संगति करिष्यामि।
(च) अहं मिथ्या न वदिष्यामि।                        (च) अहं सदा स्ववेशानुरागी भवेयम्।

प्रश्न 7 .
नोट –
विद्यार्थी स्वयं करें।

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