Chapter 2 राजधर्म (मंजरी)

महत्त्वपूर्ण गद्याश की व्याख्या

“बोधिसत्व से ………………………………. व्रत है।”
संदर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘मंजरी’ के  ‘‘राजधर्म” नामक पाठ से लिया गया है। यह जातक कथा (कहानी) से उद्धृत है।

प्रसंग:
राजा ने बोधिसत्व द्वारा दिए गए कड़वे गोदे थूक दिए। बोधिसत्व ने बताया कि राजा के अधार्मिक होने से जंगल के कन्दमूल और फल नीरस हो जाते हैं।

व्याख्या:
राजा ने स्वयं बोधिसत्व को विनयपूर्वक यह सच्चाई बताई कि उसने ही पहले गोदों । (फलों) को मीठा किया था और बाद में उन्हें कड़वा कर दिया। पहले वह धार्मिक और न्यायपूर्ण ढंग से राज्य करता था परन्तु बाद में अन्याय करना शुरू कर दिया। बोधिसत्व ने जो राजधर्म बताया, वह सत्य सिद्ध हो गया। अतः राजा ने राजधर्म अपनाकर कड़वे फलों को मीठा करने का इरादा किया। उसने अपने इस संकल्प  और व्रत का पालन करना शुरू कर दिया। उसका राज्य फिर खुशहाली से भर गया।

पाठ का सर (सारांश)

प्राचीनकाल में वाराणसी में ब्रह्मदत्त नामक धर्म और न्यायपरायण राजा राज्य करता था। उसके राज्य में बोधिसत्व (बुद्ध) एक ब्राह्मण कुल में पैदा हुए। वह हिमालय प्रदेश में तपस्या में लीन रहते थे।
राजा ब्रह्मदत्त विवेकशील था। राज्य में कोई ऐसा व्यक्ति न था, जो उसके दोष बताए। एक दिन राजा घूमता हुआ हिमालय प्रदेश में बोधिसत्व के आश्रम में पहुँचा। उसने बोधिसत्व को प्रणाम किया और चुपचाप बैठ गया। बोधिसत्व द्वारा दिए गए मीठे और स्वादिष्ट गोदे खाकर, राजा ने उनके मीठे और स्वादिष्ट होने का कारण पूछा। बोधिसत्व ने बताया कि राजा के धार्मिक और न्यायप्रिय होने से सब वस्तुएँ मधुर होती हैं। इस बात की सच्चाई जानने को राजा ने अधर्म और अन्याय से राज्य करना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद राजा फिर आश्रम में पहुँचा। इस बार जो गोदे उसने खाए, वह कड़वे थे। बोधिसत्व ने  इसका कारण राजा का अधार्मिक और अन्यायी होना बताया। राजा के कुमार्ग पर चलने से प्रजा भी वैसा ही करती है। इसके प्रतिकूल धर्म का अनुसरण करने वाले राजा की प्रजा भी धर्म का मार्ग अपनाती है। राजा ने बोधिसत्व के सामने प्रत्यक्ष होकर सारी बात बता दी। उसने निश्चय किया कि वह गोदों को कभी कड़वा नहीं होने देगी। उसने धर्मपूर्वक न्याय से राज्य करना शुरु कर दिया। राज्य में फिर से सम्पन्नता आ गई।

प्रश्न-अभ्यास

कुछ करने को

प्रश्न 1:
अपने आस-पास क्षेत्र में पाये जाने वाले बरगद, पीपल, पाकड़ या अन्य वृक्षों को निकट से देखिए और उन पर बैठे पक्षियों के क्रियाकलापों को अपनी अभ्यास-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2:
बरगद के वृक्ष का चित्र बनाइए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 3:
इस पाठ के आधार पर आप भी दो सवाल बनाइए।
उत्तर:
प्र०1. ब्रह्मदत्त अपने विषय में क्या जानना चाहता था?
प्र०2. क्या ऐसा सच में हो सकता है कि राजा  के अन्यायी होने पर राज्य में उगने वाले फल भी कडवे हो जाएँगे।

प्रश्न 4:
लिखिए-इस कहानी को पढ़ने के बाद आप क्या करेंगे ? क्या नहीं करेंगे ?
उत्तर:
क्या करेंगे: अधर्म, अन्याय और पार का रास्ता छोड़ दूंगा।
क्या नहीं करेंगे: कभी किसी को परेशान नहीं करूंगा, किसी को तकलीफ नहीं पहुँचा

विचार और कल्पना

प्रश्न 1:
इस पाठ में एक अच्छे राजा के आवश्यक गुण बताये गये हैं। आपके विचार में किसी राजा/श्रेष्ठ व्यक्ति/नेता में कौन-कौन से गुण होने चाहिए? उन्हें लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से स्वयं करें। 

प्रश्न 2:
जब राजा ने अन्याय और अधर्म के साथ राज्य किया होगा, तब उसकी प्रजा को क्या-क्या कष्ट भोगने पड़े होंगे ?
उत्तर:
चारों तरफ अशान्ति और अराजकता का साम्राज्य बन गया होगा। लूट-पाट, चोरी, राहजनी एवं हत्याएँ बढ़ गई होंगी जिससे प्रजा परेशान हो गई होगी।

प्रश्न 3:
बोधिसत्व जंगल के पके गोदे खाते थे जो शक्कर के समान मीठे थे।  आप अपने द्वारा खाए हुए उन फलों के नाम लिखिए जो एक बीज वाले हों, अनेक बीज वाले हों।
उत्तर:
(क) एक बीज वाले फल             –             आम, लीची, आड़, जामुन
(ख) अनेक बीज वाले फल          –             सेब, तरबूज, खरबूजा, संतरा
(ग) बिना बीज वाले फल             –             केला, अंगूर
(घ) कड़े छिलके वाले फल          –            अखरोट, नारियल, बेल

कहानी से

प्रश्न 1:
ब्रह्मदत्त नामक राजा क्यों प्रसिद्ध था?
उत्तर:
राजा ब्रह्मदत्त अपनी धर्मप्रियता और न्यायपरायण शासन के लिए प्रसिद्ध था।

प्रश्न 2:
राजा ब्रह्मदत्त वेश बदलकर क्यों घूमता था?
उत्तर:
राजा ब्रह्मदत्त वेश बदलकर यह जानने के लिए घूमते थे कि उसका दोष बताने वाला भी है या नहीं।

प्रश्न 3:
बोधिसत्व ने राजा को गोदों के मीठे और स्वादिष्ट होने का क्या कारण बताया?
उत्तर:
बोधिसत्व ने गोदों के मीठे और स्वादिष्ट होने का कारण राजा का धार्मिक और न्यायपरायण होना बताया।

प्रश्न 4:
राजा ने अधर्म और अन्याय से राज्य करना क्यों शुरु किया?
उत्तर:
राजा ने तपस्वी बोधिसत्व के कथन की परीक्षा लेने के लिए  अधर्म और अन्याय से राज्य करना शुरू किया।

प्रश्न 5:
‘राजा के धर्म विमुख होने पर सारा राज्य दुख को प्राप्त होता है’ कथन का आशय बताइए।
उत्तर:
राजा के धर्म विमुख होने से सारा राज्य दुख को प्राप्त होता है। इसका अर्थ है यथा राजा । तथा प्रजा। बुरे नेताओं से देश में अराजकता और दुख उत्पन्न होता है।

भाषा की बातप्रश्न

प्रश्न 1:
नीचे लिखे हुए …………………. वाक्य बने हैं।
नीचे लिखे मिश्रित वाक्यों से मुख्य और अधीन वाक्य अलग-अलग लिखिए (वाक्य लिखकर)

(क) वह ऐसे व्यक्ति को ढूँढता था।                     –             मुख्य वाक्य
जो उसके दोषों को बता सके।                             –            अधीन वाक्य

(ख) अधर्म और अन्याय से राज करूगा और देगा।        –            मुख्य वाक्य
कि बोधिसत्त्व की बात में कितनी सच्चाई है?                   –          अधीन वाक्य

प्रश्न 2:
तुलना की दृष्टि से ………………….का अर्थ ‘सबसे श्रेष्ठ’ है।  इसी प्रकार नीचे दिये गये शब्दों के तीनों रूप लिखिए ( रूप लिखकर )
उत्तर:

प्रश्न 3:
नीचे कुछ शब्द और उनके विलोम शब्द दिये गये हैं। उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़कर शब्द और उनके विलोम शब्दों के जोड़े बनाकर लिखिए (जोड़े बनाकर)
उत्तर:

प्रश्न 4:
शब्द अन्त्याक्षरी को आगे बढ़ाइए- प्रबन्ध-धनवान-नदी ……..
उत्तर:
प्रबन्ध – धनवान – नदी – दीवाली – लीची – चीनी – नीला – लाल – लड़की – कील

यह भी करें:
एक बार की बात है। भारत के एक प्रसिद्ध संत जापान की यात्रा पर गए थे। एक दिन वे ट्रेन से जापान के भीतर उन भागों में घूम रहे थे। उस दिन वे फलाहार पर थे। फल खरीदने के लिए वे एक स्टेशन पर उतरे। लेकिन उन्हें कहीं कोई फलवाला नहीं दिखाई दिया।  फलवाले को ढूंढते-ढूंढते जब वे थक गए तो अपने-आप में बड़बड़ाए कि कैसा देश है यह? यहाँ फल भी नहीं मिलता। उनकी बात वहाँ बैठा एक युवक सुन रहा था। वह झट से उठा और दौड़कर कहीं गया। 15-20 मिनट बाद वह अपने हाथ में फलों की टोकरी लेकर लौटा और संत को आदरपूर्वक दे दिया। संत ने कृतज्ञता व्यक्त की और फलों की कीमत देने की बात की। युवक ने विनम्रतापूर्वक फलों की कीमत लेने से इनकार दिया और बड़ी ही मधुर वाणी में उसने संत से कहा- महामना! यदि आप मुझे कुछ देना ही चाहते हैं तो कृपया यह वचन दीजिए कि आप अपने देश में जाकर ये नहीं कहेंगे कि जापान में फल नहीं मिलता। इससे मेरे देश की बदनामी होगी। वे महान भारतीय संत उस युवक का अपने देश के प्रति प्रेम देखकर आश्चर्यचकित और आत्मविभोर हो गए।

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