Chapter 28 बेगम हजरत महल (महान व्यक्तिव)

पाठ का सारांश

बेगम हजरत महल ने 1857 ई० के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में चिरस्मरणीय योगदान किया। ये अवध के नवाब वाजिदअली शाह की बेगम थीं। अवध पर परोक्ष रूप में अँग्रेजों की सत्ता थी; क्योंकि 1801 ई० में पहले नवाब सआदतअली खाँ ने लार्ड वेलेजली की सहायक संधि स्वीकार कर ली थी। जब 1847 ई० में वाजिदअली शाह गद्दी पर बैठे, तब उन्हें अँग्रेजों का हस्तक्षेप अच्छा नहीं लगा। इस कारण लॉर्ड डलहौजी ने उन पर कुशासन का दोष लगाकर कोलकाता में नजरबन्द कर दिया और अवध पर अँग्रेजों का शासन हो गया। अँग्रेजों से असन्तुष्ट होकर क्रान्तिकारियों ने 30 मई, 1857 ई० को लखनऊ में विद्रोह शुरू कर दिया तथा अनेक स्थान अँग्रेजों से छीन लिए। 30 जून को चिनहट में अँग्रेज पराजित हुए और उन्होंने लखनऊ रेजीडेंसी में शरण ली।

बेगम हजरत महल को पुत्र बिरजीसकद्र अवध का नवाब घोषित किया गया। बेगम हजरत महल उसकी संरक्षिका बनीं। इन्होंने योग्य अधिकारी नियुक्त किए और उच्चाधिकारी व सामन्तों को संगठित किया। बेगम ने स्त्रियों का एक सैनिक संगठन बनाया तथा कुछ स्त्रियों को जासूसी का काम सौंपा।

बहादुरशाह जफर के बन्दी बनने और अँग्रेजों का दिल्ली पर अधिकार होने से क्रान्तिकारियों के हौसले कमजोर पड़ने लगे। बेगम ने कैसरबाग के दरवाजे पर ताले लगवा दिए। घनघोर बारिश में बेगम क्रान्तिकारियों का उत्साह बढ़ा रही थीं। उनकी प्रेरणा से क्रान्तिकारी एक-एक इंच भूमि के लिए लड़ रहे थे। अन्ततः हैवलॉक और कैंपवेल ने मार्च 1858 ई० में लखनऊ पर फिर अधिकार कर लिया और रेजीडेंसी में बन्द अँग्रेज परिवारों को मुक्त करा दिया। बेगम हजरत महल अपने पुत्र बिरजीसकद्र के साथ नेपाल चली गईं। बेगम के स्वाभिमान से प्रभावित होकर राणा जंगबहादुर ने इन्हें नेपाल में रहने की जगह दिलाई। सन् 1874 ई० में इन वीरांगना का निधन हो गया।

बेगम हजरत महल ने भारतीय परम्परा के अनुसार अँग्रेज कैदियों और परिवारों को सुरक्षित रखा। वस्तुतः बेगम हजरत महल का व्यक्तित्व भारत के नारी समाज का प्रतिनिधित्व करता है।

अभ्यास

प्रश्न 1.
लॉर्ड डलहौजी ने नवाब वाजिदअली शाह को क्यों कैद किया?
उत्तर :
नवाब वाजिदअली शाह राज्य में सुधार करना चाहते थे और उन्हें अँग्रेजों का हस्तक्षेप पसन्द नहीं था; इसलिए लॉर्ड डलहौजी ने नवाब वाजिदअली शाह को कैद किया।

प्रश्न 2.
अवध साम्राज्य के अन्तर्गत कौन-कौन से क्षेत्र थे?
उत्तर ;
अवध साम्राज्य के अन्तर्गत सीतापुर, मुहम्मदी, सिकरौरा, गोंडा, बहराइच, फैजाबाद, सुल्तानपुर, सलोन, बेगमगंज आदि क्षेत्र थे।

प्रश्न 3.
नेपाल के राजा ने बेगम हजरत महल को शरण देने में पहले असमर्थता क्यों जताई?
उत्तर :
नेपाल के राजा बेगम हजरत महल को शरण देकर अँग्रेजों का विरोध नहीं सहना चाहते थे।

प्रश्न 4.
1857 के संग्राम में बेगम हजरत महल द्वारा किए गये प्रमुख कार्यों की सूची बनाइए।
उत्तर :
बेगम हजरत महल ने राज-काज के कार्यों में तत्परता से कार्य किया। उन्होंने योग्य अधिकारियों को ऊँचे पदों पर नियुक्त किया। विषम परिस्थिति और सीमित साधन होने पर भी उन्होंने लोगों में उत्साह भर दिया। उन्होंने उच्चाधिकारियों और सामन्तों को संगठित किया। बेगम ने स्त्रियों का एक सैनिक संगठन बनाया। कुछ स्त्रियों को उन्होंने जासूसी के कार्य सौंपे।

प्रश्न 5.
सही (✓)(✗) का चिह्न लगाइए (चिह्न लगाकर) –

(क) वाजिदअली शाह 1847 में अवध की गद्दी पर बैठे। (✓)
(ख) बेगम हजरत महल’ने साम्राज्यवादी सहायक संधि पर हस्ताक्षर कर दिया था। (✗)
(ग) बेगम हजरत महल नवाब वाजिदअली शाह की पत्नी थीं। (✓)
(घ) बेगम हजरत महल ने अँग्रेजों के मान-सम्मान और पेंशन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। (✗)

प्रश्न 6.
रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके) –

(क) अवध साम्राज्य को डलहौजी ने सन् 1856 ई0 में अंग्रेज शासन के अधीन कर लिया। (लार्ड वेलेजली, डलहौजी, हैवलॉक)
(ख) लॉर्ड वेलेजली ने सआदत अली से साम्राज्यवादी सहायक संधि पर हस्ताक्षर कर लिया। (सआदत अली, वाजिद अली शाह, बेगम हजरत महल)
(ग) लखनऊ पर अँग्रेजों के अधिकार के पश्चात् बेगम हजरत महल अपने पुत्र के साथ नेपाल चली गईं। (कोलकाता, दिल्ली, नेपाल)
(घ) चिनहट युद्ध में हारने के बाद सभी अँग्रेजों ने लखनऊ के रेजीडेंसी में शरण ली। (रेजीडेंसी, आलमबाग, शाही महल)

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