Chapter 30 मुंशी प्रेमचन्द (महान व्यक्तित्व)

पाठ का सारांश

मुंशी प्रेमचन्द का असली नाम धनपत राय था। इनका जन्म सन् 1880 में वाराणसी जिले के लमही ग्राम में हुआ था। इनके पिता अजायबराय डाकखाने में क्लर्क थे। प्रेमचन्द की शिक्षा का आरम्भ उर्दू में हुआ था। इनका बचपन कठिनाई में बीता, फिर भी इन्होंने बी०ए० की परीक्षा ट्यूशन पढा-पढ़ाकर पास कर ली। फिर अट्ठारह रुपये मासिक वेतन पर अध्यापक बने। इसके बाद सब-डिप्टी इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल हुए। देश की आजादी के लिए इन्होंने देशप्रेम की कहानियाँ लिखीं और अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण नीतियों के विरुद्ध लिखा। प्रेमचन्द सामाजिक कुरीतियों, अर्थहीन रूढ़ियों, परम्पराओं और अन्ध-विश्वासों का विरोध  करते रहे। गांधी जी के कहने पर ये स्वाधीनता की लड़ाई में सम्मिलित हुए। अनेक कहानियों तथा उपन्यासों के द्वारा भारतीय संस्कृति तथा समाज का सही चित्रण प्रस्तुत किया और उसे प्रगति के उपाय सुझाए।

अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
प्रेमचन्द अपनी शिक्षा क्रम से जारी क्यों नहीं रख सके?
उत्तर:
प्रेमचन्द के पिता का तबादला एक जगह से दूसरी जगह होता रहता था। इससे वे अपनी शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके।

प्रश्न 2:
प्रारम्भिक जीवन में प्रेमचन्द ने आर्थिक कठिनाइयों  का सामना किस प्रकार किया?
उत्तर:
जब प्रेमचन्द आठ वर्ष के थे, तभी उनकी माता का देहान्त हो गया था। पिता ने दूसरा विवाह कर लिया, परन्तु प्रेमचन्द को विमाता से वह स्नेह नहीं मिला, जो अपनी माता से मिलता था।

प्रश्न 3:
प्रेमचन्द ने किस उद्देश्य से अपने उपन्यासों और कहानियों की रचना की?
उत्तर:
प्रेमचन्द ने अपने उपन्यासों और कहानियों की रचना सामाजिक  कुरीतियों, सदियों की परम्पराओं और अन्धविश्वासों का विरोध करने के लिए की। उन्होंने बाल-विवाह का विरोध और विधवी विवाह का समर्थन किया। उनकी रचनाओं में देशप्रेम की भावना व्यक्त होती है।

प्रश्न 4:
ऐसी दो राजनीतिक घटनाओं को लिखिए, जिनका उनके हृदय पर इतना प्रभाव पड़ा कि वे अन्याय का विरोध करने के लिए तत्पर हो गए।
उत्तर:
प्रेमचन्द द्वारा लिखित ‘सोजे वतन’ की सभी प्रतियाँ अँग्रेजी सरकार  ने छीन लीं और उस पुस्तक पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। दूसरी घटना यह थी कि कलक्टर उनकी गाय को गोली मारना चाहता था।

प्रश्न 5:
प्रेमचंद के रचनाओं के बारे में लिखिए।
उत्तर:
शुरुआत में प्रेमचंद ने देशप्रेम की कहानियाँ लिखीं। ये अंग्रेजों के अन्याय के विरुद्ध भी लिखा करते थे। प्रेमचंद की इस प्रकार की कहानियों का संग्रह ‘सोजे वतन’ सन् 1909 में प्रकाशित हुआ। इन्होंने उर्दू में एक उपन्यास प्रेमा लिखा।  फिर सेवासदने रंग भूमि, कर्मभूमि, गबन, गोदान, प्रेमाश्रये, कायाकल्प जैसे उपन्यास एक के बाद एक प्रकाशित हुए। उन्होंने सैकड़ों कहानियाँ भी लिखीं जिनका संग्रह ‘मानसरोवर’ नाम से आठ भागों में प्रकाशित हुआ।

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