Chapter 31 सुब्रह्मण्यम् भारती (महान व्यक्तित्व)

पाठ कां सारांश

सुबह्मण्यम् को जन्म तमिलनाडु के शिवयेरी ग्राम में सन् 1882 ई० को हुआ। इनके पिता चिन्नास्वामी तमिल भाषा के प्रकांड पंडित थे; जिनका एटटपुरम दरबार में मान था। सुब्रह्मण्यम्। बचपन से ही कविता करने लगे थे। ग्यारह वर्ष की अवस्था में इनकी काव्य प्रतिभा देखकर विद्वानों ने इन्हें ‘भारती’ की उपाधि दी। पाँच वर्ष की अवस्था में ही माँ के मरने पर दूसरी माँ ने इन्हें और इनकी बहन भागीरथी को माँ जैसा प्यार दिया।  पिता के मरने पर चौदह वर्ष के बालक भारती के लिए परिवार चलाना दुरूह हो गया। निर्धनता की मार्मिक अनुभूति इनकी कविता ‘ धन की महिमा’ में व्यक्त हुई। | भारती ने वाराणसी जाकर हिन्दी, संस्कृत का अध्ययन किया। अँग्रेजी की शिक्षा पिता के समय में ही तिरुवेलवेली के अँगेजी स्कूल में प्राप्त की। हिन्दी को ये देश की एकता के लिए सक्षम समझते थे। वाराणसी में इन्होंने काशी क्षेत्र तथा वहाँ की संस्कृति का अध्ययन किया। एक वर्ष के बाद ये फिर अपर्ने गाँव में आकर साहित्य साधनारत हो गए। इन्हें स्वच्छन्दतावादी कविताएँ पसन्द थीं। शैली के नाम पर इन्होंने अपना उपनाम ‘शैल्लिदासन’ रख.लिया था। इन्होंने अँग्रेजी कविताओं का तमिल में अनुवाद किया।
भारती में मानवतावादी दृष्टिकोण प्रबल था। समाज की उन्नति के लिए ये आपसी मेल-जोल जरूरी समझते थे। इनकी कविताओं में राष्ट्रीयता का स्वर मुखरित हुआ। इन्होंने तमिलवासियों को जाग्रत कर राष्ट्रीय आन्दोलन के लिए प्रेरित  किया। भारती शान्ति एवं अहिंसा के पुजारी थे। अहिंसा से स्वराज्य प्राप्त करना इनका अभीष्ट थी। भारती स्वभाव से दानी थे। इनकी दानशीलता की अनेक कथाएँ आज भी तमिलनाडु में प्रचलित हैं। भारती बच्चों से बहुत स्नेह करते थे और कभी-कभी बच्चों जैसा आचरण भी करने लगते थे। पागल हाथी को गन्ना और नारियल खिलाते समय उसके धक्के से ये बेहोश हो गए। अस्पताल में बीमार रहकर 12 दिसम्बर, 1922 ई० को इनका निधन हो गया।
भारती देश की एकता और अखण्डता के पोषक थे। ये ऐसी स्वतन्त्रता के पोषक थे, जो एकता और समानता पर टिकी हो। इनकी कृतियों को तमिलनाडु सरकार ने ‘भारती-ग्रन्थावली’ के अन्तर्गत तीन खण्डों में प्रकाशित किया है।

अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
सुब्रह्मण्यम् भारती ने देश के विकास के लिए किन बातों को आवश्यक माना है?
उत्तर:
भारती देश के विकास के लिए आपसी मेल-जोल की भावना, मानवतावादी दृष्टिकोण, साम्प्रदायिकता और भेदभाव का त्याग, एकता और समानता पर टिकी देश की स्वाधीनता, संगठन और सहयोग, राष्ट्रीय भाषा हिन्दी को बढ़ावा देना  आदि आवश्यक मानते थे।

प्रश्न 2:
सुब्रह्मण्यम् भारती किस प्रकार राष्ट्रीय एकता स्थापित करना चाहते थे?
उत्तर:
सुब्रह्मण्यम् समानता और सद्भावना पर टिकी राष्ट्रीय एकता स्थापित करना चाहते थे। उनका दृष्टिकोण मानवतावादी था।

प्रश्न 3:
नीचे लिखे वाक्यों के सम्मुख अंकित शब्दों में से सही शब्द छाँटकर वाक्य पूरा कीजिए ( पूरा करके)
(क) सुब्रह्मण्यम् को ‘भारती’ की उपाधि से बचपन में विभूषित किया गया। (वृद्धावस्था, बचपन, युवावस्था, मरणोपरांत)
(ख) ‘भारती’ ने हिन्दी, संस्कृत की शिक्षा वाराणसी में प्राप्त की थी।  (मद्रास में, तिरुवेलवेली में, वाराणसी में)
(ग) “भारती’ की बहन का नाम भागीरथी था। (भागीरथी, सावित्री, चेल्लम्मा)

प्रश्न 4:
‘भारती’ को किस बात का विशेष शौक था?
उत्तर:
‘भारती’ प्राचीन साहित्य के बड़े पारखी थे। उनको विभिन्न भाषाओं के प्राचीन साहित्य को संकलित करने का शौक था।

प्रश्न 5:
‘भारती’ के जीवन की किन्हीं 5 विशेषताओं का  उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. भारती का दृष्टिकोण मानवतावादी था। वे समाज की उन्नति के लिए आपसी मेलजोल जरूरी समझते थे।
  2.  भारती राष्ट्रीयता के पोषक थे।
  3. वे शान्ति और अहिंसा के पुजारी थे।
  4. भारती स्वभाव से दानी थे।
  5.  वे बच्चों से विशेष प्यार करते थे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *