Chapter 34 सरफरोशी की तमन्ना

पाठ का सारांश

6 अगस्त 1925 ई० को काकोरी काण्ड की घटना हुई। काकोरी स्टेशन से डेढ़ मील आगे क्रान्तिकारियों ने गाड़ी रोककर सरकारी खजाना लूटा। उनका उद्देश्य लूट के धन से हथियार खरीदना था। काकोरी काण्ड में बाईस लोगों पर मुकदमा चलाया गया। इसमें रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, राजेन्द्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फाँसी की सजा सुनाई गई। राम प्रसाद बिस्मिल शाहजहाँपुर में 1897 ई० में पैदा हुए। क्रान्तिकारी रामप्रसाद बिस्मिल बचपन में नटखट स्वभाव के थे। इनके पिता मुरलीधर तिवारी इन्हें किसी व्यवसाय में लगाना चाहते थे। माँ के प्रभाव से इन्होंने अंग्रेजी पढ़ना सीखा। दयानन्द सरस्वती द्वारा लिखित ग्रन्थ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ के अध्ययन से इनकी जीवन दिशा बदल गई। नवीं कक्षा से ही ये कांग्रेस में शामिल हो गए। इन्होंने हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसियेशन की स्थापना की।

क्रान्तिकारी होने के साथ राम प्रसाद बिस्मिल लेखक भी थे। इनकी पहली पुस्तक ‘अमेरिका को स्वतन्त्रता कैसे मिली थी। देशवासियों के नाम संदेश’, ‘बोलशेविकों की करतूत’, ‘मन की लहर’, ‘कैथेराइन’, ‘स्वदेशी रंग’ अन्य रचनाएँ है। फाँसी के दिन माता-पिता उनसे मिलने गए। माँ ने उनकी आँखों में आँसू देखकर उसे ढाढस बँधाया। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसी माँ फिर कहाँ मिलेगी। इस कारण आँसू आए। मन्त्रों का जाप करते हुए उन्होंने 19 दिसम्बर, 1927 ई० को गोरखपुर जेल में फाँसी का फन्दा गले में डाल लिया।

19 दिसम्बर को ही फैजाबाद जिले में अशफाक उल्ला खाँ को फाँसी दी गई। अशफाक उल्ला खाँ शाहजहाँपुर के रहने वाले थे। तैराकी, घुड़सवारी, क्रिकेट, हॉकी खेलने और बन्दूक चलाने में प्रवीण थे। वे पं० रामप्रसाद बिस्मिल के अच्छे दोस्त थे। वे बहुत खुशी के साथ कुरान शरीफ साथ लेकर हाजियों की भाँति कलाम पढ़ते हुए फाँसी के तख्ते पर चढ़ गए। 17 दिसम्बर, 1927 ई० को राजेन्द्र लाहिड़ी को गोंडा जेल में फाँसी दी गई। राजेन्द्र लाहिड़ी पहले क्रान्तिकारी सान्याल बाबू के दल में थे। बाद में वे बनारस के जिला प्रबन्धक नियुक्त हुए। वे प्रान्तीय कमेटी के सदस्य भी रहे। मृत्यु उनके लिए एक ऐसी स्वाभाविक अवस्था थी, जैसे प्रात:कालीन सूर्य का उदय होना। | क्रान्तिकारी रोशन सिंह ने फाँसी का संदेशा सुनकर बड़े धैर्य, साहस और शौर्य का प्रदर्शन किया।

ठाकुर रोशन सिंह शाहजहाँपुर जिले के नवादा ग्राम के निवासी थे। बचपन से ही वे दौड़-धूप करने में बहुत आगे थे। उन्होंने शाहजहाँपुर और बरेली के गाँवों में घूम-घूमकर असहयोग आन्दोलन का प्रचार किया। | उन्हें अंग्रेजी का मामूली ज्ञान था लेकिन हिन्दी और उर्दू अच्छी तरह जानते थे। जेल से फाँसी के तख्ते तक उनका व्यवहार निर्भीक पुरुष की तरह था। उनका कहना था कि जो आदमी धर्मयुद्ध में प्राण देता है, उसकी वही गति होती है जो जंगल में तपस्या करने वालों की। फाँसी पर चढ़ते ही उन्होंने वन्देमातरम् का नाद किया और ॐ का स्मरण करते हुए शहीद हो गए।

अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए
(1) काकोरी काण्ड का उद्देश्य क्या था?
उत्तर :
काकोरी काण्ड का उद्देश्य सरकारी खजाना लूटकर हथियार खरीदना था क्योंकि क्रान्तिकारियों को बन्दूकों की जरूरत थी।

(2) फाँसी की सजा किन क्रान्तिकारियों को दी गई?
उत्तर :
फाँसी की सजा पं० रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, राजेन्द्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को दी गई।

(3) रामप्रसाद बिस्मिल माँ को देखकर क्यों रोए?
उत्तर :
रामप्रसाद बिस्मिल की आँखों में आँसू यह सोचकर आए कि “तुम जैसी माँ फिर कहाँ पाऊँगा।” इस कमी का आभास होने से माँ को देखकर रोए।

प्रश्न 2.
सही मिलान कीजिए (मिलान करके)
उत्तर :
UP Board Solutions for Class 8 Hindi Chapter 34 सरफरोशी की तमन्ना (महान व्यक्तित्व) 1
प्रश्न 3.
सही (✓) अथवा गलत (✗) का निशान लगाइए

  • अशफाक उल्ला, रामप्रसाद के बचपन के मित्र थे। (✓)
  • राजेन्द्र लाहिड़ी फाँसी की सजा सुनकर डर गए। (✗)
  • ठाकुर रोशन सिंह दौड़ने-धूपने के काम में आगे थे। (✓)
  • राम प्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारी होने के साथ-साथ लेखक भी थे। (✓)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *