Chapter 38 वर्तमान काल के महान संगीतज्ञ

पाठ का सारांश

लता मंगेशकर-लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर, 1929 को इन्दौर में हुआ। इनकी माता का नाम शुद्धमती और पिता का नाम पं० दीनानाथ मंगेशकर था जो शास्त्रीय गायक थे। उन्होंने लता को पाँच वर्ष की आयु में संगीत की शिक्षा देनी शुरू कर दी। लता ने अपना पहला आकाशवाणी कार्यक्रम 16 दिसम्बर, 1941 ई० को प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर माता-पिता गद्गद हो गए। सन् 1942 में पिता की मृत्यु होने पर लता ने छह फिल्मों में अभिनय किया और परिवार को सँभाला। लता की गायन शैली से प्रभावित होकर नौशाद व हुस्नलाल भगतराम ने उन्हें अपनी फिल्मों ‘अन्दाज’ और ‘बड़ी बहिन’ में मौका दिया। सन् 1949 से लता के स्वर से सजी फिल्में आईं- ‘बरसात’, ‘अन्दाज’ ‘दुलारी’ और ‘महल’। महल का गीत ‘आएगा आने वाला’ अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। लता जी लोगों के दिमाग पर छा गईं और वह आज भी फिल्म संगीत में साम्राज्ञी के पद पर विराजमान हैं।

सन् 1962 ई० में चीनी आक्रमण के बाद सँधे कंठ से गाया गाना “ऐ मेरे वतन के लोगों” देशवासियों को तड़पा गया। नेहरू जी की आँखों में आँसू आ गए। | लता जी के विषय में कुछ रोचक बातें- वे भारत में पुनर्जन्म चाहती हैं। स्वर की मधुरता के लिए वे कोल्हापुरी काली मिर्च खाती हैं। वे मंच पर नंगे पाँव गाती हैं। रायल अलबर्ट हाल लन्दन में गाने वाली वे प्रथम भारतीय महिला हैं। वे ‘भारत-रत्न’ पाने वाली प्रथम पाश्र्व गायिका हैं। वे बीस भाषाओं में 50,000 से अधिक गीत गाकर विश्व रिकार्ड बना चुकी हैं। इनका नाम गिनीज बुक वर्ल्ड रिकार्ड में है। उनकी आवाज विश्व की सबसे आदर्श आवाज है। लता जी विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित की जा चुकी हैं, जिनमें निम्न प्रमुख हैं- फिल्म फेयर पुरस्कार, महाराष्ट्र रत्न पुरस्कार, पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण, जीवन गौरव पुरस्कार, नूरजहाँ सम्मान, हाकिम खाने सुर अवार्ड, स्वरभारती पुरस्कार, 250 ट्राफी, 150 गोल्डन डिस्क, दादा साहब फाल्के पुरस्कार तथा भारत-रत्न।

शहनाई के जादूगर बिस्मिल्लाह खाँ-बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म 21 मार्च, 1916 ई० को डुमराँव (बिहार) में हुआ। इनके पूर्वज डुमराँव रियासत के दरबारी संगीतज्ञ थे। इन्हें संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा इनके चाचा अलीबख्श से मिली जो काशी विश्वनाथ मन्दिर में शहनाई बजाते थे।

इन्होंने अपनी शहनाई की गूंज से अफगानिस्तान, यूरोप, इराक, कनाडा, अफ्रीका, रूस, अमेरिका, जापान, हाँगकाँग समेत विश्व के सभी प्रमुख देशों के श्रोताओं को रसमग्न किया है। यद्यपि उनका संगीत समुद्र की तरह विराट है, फिर भी वे नम्रतापूर्वक कहते हैं कि उनकी खोज अभी जारी है।

संगीत में उनके विशेष योगदान के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। सन् 2000 ई० में उन्हें भारत-रत्न से सम्मानित किया गया। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, तानसेन पुरस्कार, मध्यप्रदेश राज्य पुरस्कार, पद्म विभूषण तथा विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की गई डॉक्टरेट की उपाधियाँ उनकी ख्याति की परिचायक हैं। खाँ साहब विनम्र, मिलनसार और उदार व्यक्तित्व वाले थे। संगीत के प्रति पूर्ण समर्पण, कड़ी मेहनत, घण्टों अभ्यास, सन्तुलित आहार, संयमित जीवन और देश प्रेम आदि गुणों ने उन्हें विश्व ख्याति दी। वे शास्त्रीय परम्परा की कड़ी हैं जिन पर देश को गर्व है।

अभ्यास-प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
प्रश्न 1.
भारत की किस गायिका का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अंकित किया गया? उनका नाम इस पुस्तक में क्यों अंकित किया गया है?
उत्तर :
भारतीय गायिका लता मंगेशकर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अंकित किया। गया है क्योंकि उन्होंने बीस भाषाओं में 50,000 से अधिक गीत गाए हैं।

प्रश्न 2.
लता जी का वह कौन सा गीत था जिसने देश में एकता व अखण्डता की मशाल जलायी?
उत्तर :
लता जी को गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों ने देश में एकता व अखंडता की मशाल जलाई।

प्रश्न 3.
पण्डित जवाहर लाल नेहरू की आँखों से आँसू निकले आए
(क) आँख में कुछ गिर जाने के कारण। ख. बीमारी के कारण।
(ग) बहुत अधिाक प्रसन्नता के कारण। 
(घ) लता मंगेशकर द्वारा शहीदों की स्मृति में गाये गीत को सुनकर।
उत्तर :
(घ) लता मंगेशकर द्वारा शहीदों की स्मृति में गाए गीत को सुनकर।

प्रश्न 4.
लता को निम्नलिखित सम्मानों में से कौन-सा सम्मान प्राप्त नहीं हुआ है
उत्तर :
(ग) नोबेल पुरस्कार।

प्रश्न 5.
भारत के प्रथम गणतन्त्र दिवस की संध्या पर लाल किले के मंच से शहनाई वादन करने वाले व्यक्ति थे।
(क) उस्ताद अली अकबर विलायत साहब
(ख) उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ साहब
(ग) उस्ताद जाकिर हुसैन साहब
(घ) उस्ताद बड़े गुलाम अली खाँ साहब
उत्तर :
(ख) उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ।

प्रश्न 6.
वे कौन से गुण हैं जो उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ को विशिष्ट बनाते हैं?
उत्तर :
उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ को जो गुण विशिष्ट बनाते हैं, वे निम्न हैं उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ विनम्र, मिलनसार और उदार व्यक्तित्व वाले थे। वे सर्वधर्म समभाव रखते थे। संगीत के प्रति पूर्ण समर्पण, कड़ी मेहनत, घण्ट्रों अभ्यास, सन्तुलित आहार, संयमित जीवन और देश प्रेम आदि गुणों ने उन्हें विश्व ख्याति दी है। वे शास्त्रीय परम्परा की कड़ी थे, जिन पर देश को गर्व है।

प्रश्न 7.
जानें: नोट – विद्यार्थी अपने शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से स्वयं करें।

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