Chapter 4 चाणक्य

पाठ का सारांश

चाणक्य का पूरा नाम विष्णुगुप्त चाणक्य था। इन्हें कौटिल्य भी कहा जाता है। ये तक्षशिला के ब्राह्मण थे। इन्होंने तक्षशिला से ज्ञानार्जन और दर्शन का अध्ययन किया। पिता की मृत्यु के बाद इनकी माता ने इनका पालन पोषण किया। मगध के राजा घनानन्द ने इन्हें दानशाला का प्रबन्धक बनाया परन्तु बाद में क्रोधी होने के कारण इन्हें पदच्युत कर दिया। चाणक्य ने नन्द वंश के विनाश करने

की प्रतिज्ञा की। इनकी भेंट चन्द्रगुप्त मौर्य से हुई जो मगध राज्य में सेनानायक था। वह महत्त्वाकांक्षी थचन्द्रगुप्त में बल था और चाणक्य में बुद्धि। बल और बुद्धि के संयोगानुसार नवीन योजना के अनुसार चन्द्रगुप्त ने मगध राज्य पर अधिकार कर लिया। 321 ई०पू० में उसका विधिवत राज्याभिषेक हुआ। चन्द्रगुप्त ने चाणक्य को महामंत्री और प्रमुख परामर्शदाता नियुक्त किया।

चाणक्य ने अपने महान ग्रन्थ ‘अर्थशास्त्र’ की रचना की। इसमें राजतन्त्र, निरंकुश शासन, देशद्रोह, राजद्रोह, शान्ति, युद्ध, सन्धि, मन्त्रिपरिषद्, प्रशासकीय अधिकारियों, निरीक्षकों, उनके कर्तव्य, राजा के अधिकारों तथा कर्तव्यों, प्रजाहित के कार्यों, राजत्व के श्रेष्ठ आदर्श, कर प्रणाली तथा राजनीति के विभिन्न विषयों व नीतियों का विवेचक किया गया है।

चाणक्य ने राजतन्त्र को उपयोगी संस्था माना। उसके अनुसार राजा में विशिष्ट गुण होने चाहिए। वह धर्मनिष्ठ, सत्यवादी, कृतज्ञ, बलशाली, वृद्धों का सम्मान करने वाला, उत्साही, विनयशील, विवेकी, निर्भीक, न्यायप्रिय, मृदुभाषी और कार्य निपुण होना चाहिए। | चाणक्य ने आधुनिक लोककल्याणकारी राज्य की कल्पना की। वे एक व्यवहार कुशल राजनीतिज्ञ थे। वे आधुनिक राजनीतिक विचारकों, चिन्तकों में अग्रणी माने जाते हैं।

अभ्यास-प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
चाणक्य को पूरा नाम क्या था? उन्हें किन नामों से जाना जाता है?
उत्तर :
चाणक्य का पूरा नाम विष्णुगुप्त चाणक्य था। उन्हें कौटिल्यं नाम से भी पुकारा जाता है।

प्रश्न 2.
नन्दवंशीय शासक घनानन्द ने चाणक्य को किस पद पर नियुक्त किया?
उत्तर :
नन्दवंशीय शासक घनानन्द ने चाणक्य को दानशाला प्रबन्धक के पद पर नियुक्त किया।

प्रश्न 3.
चाणक्य की नयी रणनीति के अनुसार चंद्रगुप्त के मगध पर आक्रमण करने का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर :
चाणक्य की नई रणनीति के अनुसार चन्द्रगुप्त के मगध पर आक्रमण करने का यह परिणाम हुआ कि मगधे पर चन्द्रगुप्त की विजय हुई और घनानन्द की हार हुई।

प्रश्न 4.
चाणक्य के अनुसार राजा में कौन-कौन से विशिष्ट गुण होने चाहिए?
उत्तर :
चाणक्य ने अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र में, राजा के विशिष्ट गुण बताए हैं। उनके अनुसार राजा धर्मनिष्ठ, सत्यवादी, कृतज्ञ, बलशाली, वृद्धों का सम्मान करने वाला, उत्साही, विनयशील, विवेकी, निर्भीक, न्यायप्रिय, मृदुभाषी और कार्य निपुण होना चाहिए।

प्रश्न 5.
चाणक्य के अनुसार लोक कल्याणकारी राज्य के क्या कर्तव्य होने चाहिए? उत्तर- चाणक्य के अनुसार लोक कल्याणकारी राज्य के निम्न कर्तव्य होने चाहिए

  • आकस्मिक और प्राकृतिक आपदाओं से नागरिकों की रक्षा करें।
  • राज्य के अपंग, शक्तिहीन, वृद्ध, रोगी और दीन-दुखियों का पालन-पोषण करना चाहिए।
  • राज्य को शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।
  • राज्य का यह कार्य है कि साहूकार, व्यापारी, शिल्पी, शासकीय अधिकारी और कर्मचारी आदि को शोषण से प्रजा की रक्षा करे।
  • राज्य को चाहिए कि क्रय-विक्रय व बाजार के लिए नियम बनाए।

प्रश्न 6.
दिए गए वाक्यों में से सही उत्तर छाँटिए –
(क) चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की बुद्धिमत्ता और कूटनीति के कारण

  • चाणक्य को अपना परामर्शदाता नियुक्त किया।
  • चाणक्य को अपना अमात्य (मंत्री) नियुक्त किया।
  • चाणक्य को अपना ‘महामात्य’ (प्रधानमंत्री) नियुक्त किया।

(ख) चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य का राज्याभिषेक

  • 298 ई०पू०किया।
  • 312 ई०पू०किया।
  • 321 ई०पू०किया।

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