Chapter 4 विभक्तीनां प्रयोगा

प्रथमा
कुलं शीलं …………………………………………………… विनश्यति॥

हिन्दी अनुवाद-कुल, शील, सत्य, बुद्धि, तेज, धैर्य, बल, गौरव, विश्वास, स्नेह (सब) दरिद्रता से नष्ट होता है।

प्रथम-द्वितीया
गुणो भूषयते …………………………………………………… भूषयते धनम्॥

हिन्दी अनुवाद-गुण से रूप की शोभा होती है, शील से कुल की शोभा होती है, सिद्धि से विद्या की शोभा होती है (और) भोगों से धन की शोभा होती है।

प्रथमा-तृतीया
मृगाः मृगैः …………………………………………………… सख्यम्

हिन्दी अनुवाद-कार्यों में समान गुण से मेल होता है। हिरन के बच्चे हिरनों के पीछे चलते हैं, गाय के गायों के पीछे, घोड़े के घोड़ों के पीछे, मूर्ख के मूर्खा के पीछे और विद्वान के विद्वानों के पीछे चलते हैं।

चतुर्थी-प्रथमा
दानाय लक्ष्मी …………………………………………………… स एव॥

हिन्दी अनुवाद- जिसकी लक्ष्मी दान के लिए, जिसकी विद्या अच्छे कार्य के लिए, जिसकी चिन्ता परमब्रह्म के चिन्तन के लिए और जिसकी वाणी परोपकार के लिए होती है, वह तीनों लोकों में अलंकार स्वरूप वन्दनीय, श्रेष्ठ है।

पञ्चमी-प्रथम
विषादष्यमृतं …………………………………………………… दुष्कुलादपि॥

हिन्दी अनुवाद-विष से अमृत ग्रहण कर लेना चाहिए। सोने को अपवित्र स्थान से भी ग्रहण कर लेना चाहिए, उत्तम विद्या नीच से भी ग्रहण कर लेनी चाहिए और बुरे कुल से भी स्त्री-रत्न (अच्छी स्त्री) ग्रहण कर लेना चाहिए।

षष्ठी-प्रथमा
हस्तस्ये भूषणं …………………………………………………… प्रयोजनम्

हिन्दी अनुवाद-हाथ की शोभा दान से है, कण्ठ की शोभा सत्य (बोलने) से है, कान की शोभा शास्त्र (विद्या) से है। फिर आभूषणों से क्या प्रयोजन? अर्थात् कुछ नहीं है।

सप्तमी
उत्सवे व्यसने …………………………………………………… बान्धवाः॥

हिन्दी अनुवाद-उत्सव में, व्यसन में (कार्य में), अकाल में, राष्ट्र पर विपत्ति में, राजा के दरबार में और श्मशान में जो साथ देता है, वही बन्धु है।

अभ्यास

प्रश्न 1.
उच्चारण करें
नोट – विद्यार्थी स्वयं उच्चारण करें।

प्रश्न 2.
एक वाक्ये में उत्तर दें
(क) दारिद्रयेण किं विनश्यति?
उत्तर :
दारिद्रयेण बलम् विनश्यति।
(ख) वन्द्यः कः भवति?
उत्तर :
यस्य लक्ष्मीः दानाय, यस्य विद्या सुकृताये, यस्य चिन्ता परब्रह्य-विनिश्चयाये, यस्य वचांसि परोपकाराय सः वन्द्यः।

(ग) श्रोत्रस्य भूषणं किं भवति?
उत्तर :
श्रोत्रस्य भूषणं शास्त्रं भवति।

(घ) बान्धवः कः भवति?
उत्तर :
उत्सवे व्यसने दुर्भिक्षे राष्ट्रविप्लवे राजद्वारे श्मशाने च यः तिष्ठति सः बान्धवः।

प्रश्न 3.
अधोलिखित पदों में लगे विभक्तियों को बताइए।
पद               विभक्ति
दानाय     –     चतुर्थी
वचांसि    –      प्रथमा
विषात्     –      पंचमी
श्रोत्रस्य    –      चतुर्थी

प्रश्न 4.
‘पुष्प’ शब्द के अलग-अलग विभक्तियों के सात रूप दिए गए हैं। उचित रूप का चयन कर वाक्य पूरा करें (वाक्य पूरा करके)
(क) पुष्पम् विकसति।
(ख) पुष्पाणि आनय।
(ग) पुष्पात सुगन्धं प्रसरति।
(घ) पुष्पैः आपणं गच्छ। 
(ङ) पुष्पेषु मधु गृहीत्वा भ्रमरः उड्डयति।
(च) पुष्पेभ्यः माला आकर्षक भवति।
(छ) पुष्पाणाम् भ्रमराः गुञ्जन्ति।

प्रश्न 5.
संस्कृत में अनुवाद करें संस्कृत अनुवाद
(क) दरिद्रता से बल नष्ट होता है।
अनुवाद : दारिद्रयेण बलम् विनश्यति।

(ख)
गुण से रूप की शोभा होती है।
अनुवाद : गुणो भूषयते रूप।

(ग)
सोने को अपवित्र स्थान से भी ग्रहण कर लेना चाहिए।
अनुवाद : अमेध्यादपित ग्राहयम काञ्चनम्।

(घ)
हाथ की शोभा दान से होती है।
अनुवाद : हस्तस्य भूषणं दान।

(ङ)
परोपकारी पूज्य होता है।
अनुवाद : परोपकारी वन्दनीयः अस्ति।

प्रश्न 6.
हिन्दी में अनुवाद करें हिन्दी अनुवाद
(क) शीलं भूषयते कुलम्।
अनुवाद : शील से कुल की शोभा होती है।

(ख)
समान-शील-व्यसनेषु सख्यम्।।
अनुवाद : कार्यों में समान गुण से मेला होता है।

(ग)
विषादप्यमृतं ग्राह्यम्।।
अनुवाद : विष से भी अमृत ग्रहण कर लेना चाहिए।

(घ)
हस्तस्य भूषणं किम् अस्ति?
अनुवाद : हाथ की शोभा किससे होती है?

(ङ) बान्धवः कः भवति?
अनुवाद : बन्धु कौन होता है?

प्रश्न 7.
सही जोड़े बनाइए-

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