Chapter 4 The Selfish Giant

Story at a Glance
Once there was a beautiful garden of a Giant. There were beautiful flowers and twelve peach trees. In spring they bore beautiful pink flowers and in autumn they bore rich fruits. The birds sat on the trees and sang very sweetly. Every afternoon many children used to play in this garden when they came back from their schools. Seven years ago the Giant had gone to visit his friend.

Now one day the Giant came back. He saw the children playing in the garden. He cried, “What are you doing there ?” The children ran away out of fear. Now the children had no place to play. They were very sad. When the spring came, there were little blossoms and little birds all over the country. But the garden of the selfish Giant was desolated. So the Giant was very sad. Everywhere summer, spring and autumn came but in the Giant’s garden there was always winter.

One morning the Giant heard a very lovely and sweet music. It was a little linnet singing outside his window. A delicious perfume came to him through the open casement. He thought that the spring had come. He peeped out but saw a wonderful sight.

The children had come into the garden through a little hole in the wall. They were sitting in every branch of the trees. The trees were in full bloom. The birds were twittering and singing melodiously. In the farthest corner there was standing a very little boy who could not reach the branches.

Seeing this the Giant’s heart melted. He said to himself, “How selfish I have been ! Now I have understood why the spring did not come in my garden.” The Giant took the little boy in his arms and seated him into the tree. The Giant said to the children, “It is your garden now, little children !” He then knocked down the wall and allowed the children to come in the garden. Thus there was again spring throughout the year. Thus this story teaches us not to be selfish. But we should love and help others as much as we can, especially the children.

कहानी पर एक दृष्टि

एक समय एक दानव का एक सुन्दर बाग था। इसमें सुन्दर-सुन्दर फूल और बारह आडू के पेड़ थे। वसन्त ऋतु में उस पर सुन्दर गुलाबी रंग के फूल आते थे और पतझड़ में उन पर बहुत-से फल लगते थे। पक्षी पेड़ों पर बैठा करते थे और बहुत मधुर गीत गाते थे। प्रत्येक दिन शाम को बहुत-से बच्चे जब वे स्कूल से वापस आते थे उस बाग में खेला करते थे। सात वर्ष पूर्व वह राक्षस अपने मित्र से मिलने गया था।

अब एक दिन दानव वापस आया। उसने बाग में बच्चों को खेलते हुए देखा। वह चिल्लाया, “तुम वहाँ क्या कर रहे हो?” बच्चे डर के कारण भाग गए। अब बच्चों के पास खेलने के लिए कोई स्थान नहीं था। वे बहुत दुःखी थे। अब वसन्त ऋतु आयी। पूरे नगर में चारों ओर छोटे-छोटे फूल और पक्षी दिखाई दिए। किन्तु स्वार्थी दानव का बाग उजाड़ था। इस प्रकार दानव बहुत दुःखी था। प्रत्येक स्थान पर गर्मी का मौसम, वसन्त ऋतु आ गयी है।

एक दिन सवेरे दानव ने बहुत सुन्दर और मधुर संगीत सुना। यह खिड़की के बाहर एक छोटा गाने वाला पक्षी था। एक मधुर सुगन्ध खुली खिड़की में से आई। उसने सोचा कि वसन्त ऋतु आ गई है। उसने बाहर झाँका। किन्तु उसे एक अद्भुत दृश्य दिखाई दिया।

दीवार में एक छोटे से सुराख में से बच्चे बाग में गये थे। वे पेड़ों की प्रत्येक शाखा पर बैठे हुए थे। वृक्ष खुब फल-फूल रहे थे। पक्षी चहचहा रहे थे और मधुर ध्वनि में गा रहे थे। दूर एक कोने में एक बहुत छोटा बच्चा खड़ा हुआ था। वह पेड़ की शाखाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है।

यह देखकर दानव का हृदय पिघल गया। उसने अपने मन में कहा, “मैं कितना मूर्ख था। अब मैं समझा हूँ कि वसन्त मेरे बाग में क्यों नहीं आया।” दानव ने बच्चे को गोद में उठाया और पेड़ पर बैठा दिया। राक्षस ने बच्चों से कहा, “ऐ बच्चों, अब यह बाग तुम्हारा है। फिर उसने दीवार गिरा दी और बच्चों को बाग में आने दिया। इस प्रकार वहाँ दोबारा पूरे वर्ष वसन्त था।

इस प्रकार यह कहानी हमें सिखाती है कि हम स्वार्थी न बनें, बल्कि जितना अधिक-से-अधिक हो सके दूसरों से प्रेम करें, एवं उनकी सहायता करें, विशेष रूप से बच्चों से।

Short Answer Type Questions

Answer one of the following questions in not more than 30 words:

Question 1.
Give a brief description of the Giant’s garden.
(दानव के बाग का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।)
Answer:
The garden was very beautiful. There were beautiful flowers which looked like stars. There were twelve peach trees which blossomed in spring and bore fruits in autumn. The birds sat on the trees and sang very melodiously.
(बाग बहुत सुन्दर था। वहाँ सुन्दर फूल थे जो सितारों जैसे लगते थे। वहाँ बारह आडू के पेड़ थे जिन पर वसन्त में फूल आते थे और पतझड़ में फल लगते थे। पक्षी पेड़ों पर बैठते थे और बड़ी मधुरता से गाते थे।)

Question 2.
Did the children know whose garden it was ? When did they come to know it?
(क्या बच्चे जानते थे कि यह बाग किसका है? उन्हें यह कब पता लगा ?)
Answer:
In the beginning the children did not know whose garden it was. But after some days one day when the Giant came and stopped the children from playing there, they came to know that it was his.
(आरम्भ में बच्चों को यह मालूम नहीं था कि बाग किसका है। किन्तु कुछ दिनों बाद एक दिन जब दानव आया और उसने बच्चों को वहाँ खेलने से रोका तब उन्हें पता लगा कि यह उसका बाग है।)

Question 3.
why did the Giant grow angry to see the little boy?
(छोटे लड़के को देखकर दानव क्यों नाराज हो गया ?)
Answer:
Seeing the little boy the Giant became angry because he had put a notice board to check the entry of the boys.
(लड़के को देखकर दानव इसलिए नाराज हो गया क्योंकि उसने बच्चों के प्रवेश को रोकने के लिए एक नोटिस लगा दिया था।)

Question 4.
Why did the Giant build a high wall round his garden and put a notice board?   [M. Imp.]
(दानव ने अपने बाग में चारों ओर दीवार क्यों बनवाई तथा एक नोटिस बोर्ड क्यों रखा ?)
Or
What did the Giant do to check the entry of the children in the garden ?
(दानव ने बाग में बच्चों के प्रवेश को रोकने के लिए क्या किया ?)
Answer:
To check the entry of the children in the garden, the Giant built a high wall all around the garden and put up a notice board : “Tresspassers will be prosecuted.”
(बाग में बच्चों के प्रवेश को रोकने के लिए राक्षस ने बाग के चारों ओर एक ऊँची दीवार बनवा दी और एक नोटिस बोर्ड लगा दिया-“बिना अधिकार प्रवेश करने वालों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”)

Question 5.
why was not the Giant happy even after this ?
(इसके पश्चात् भी दानव खुश क्यों नहीं हुआ ?)
Answer:
Its result was that the children did not enter the garden. But the spring also went away. There was only snow, frost, North wind and hail. The garden became desolated. So the Giant was not happy even after this.
(इसका परिणाम यह हुआ कि बच्चों ने बाग में प्रवेश नहीं किया। किन्तु वसन्त भी चला गया। वहाँ केवल बर्फ, कोहरा, ठण्डी उत्तरी हवा और ओले रह गए। बाग सुनसान और उजाड़ हो गया। इस कारण इसके पश्चात् भी दानवे खुश नहीं हुआ।)

Question 6.
How did the children feel now ?
(अब बच्चों ने कैसा अनुभव किया ?)
Answer:
The children felt very sad. They had no place for playing. They remembered the happy days when they played in the beautiful garden and enjoyed it.
(बच्चों को बहुत दु:ख हुआ। उन्हें खेलने के लिए कोई स्थान नहीं मिला। उन्हें उन आनन्द के दिनों की याद आई जब वे सुन्दर बाग में खेलते थे और आनन्द प्राप्त करते थे।)

Question 7.
why did the spring go away from the garden ?
(वसन्त बाग से क्यों चला गया ?)
Or
Why did the spring not come to the giant’s garden ?   [Imp.]
(दानव के बाग में वसन्त ऋतु क्यों नहीं आई ?)
Answer:
The spring went away from the garden because the Giant was selfish and did not let the children play there.
(वसन्त, बाग से चला गया क्योंकि दानव स्वार्थी था और उसने वहाँ बच्चों को नहीं खेलने दिया।)

Question 8.
How was the.Giant punished?
(दानव को दण्ड कैसे मिला ?)
Answer:
The Giant was punished by making his garden a desolated place.
(बाग को सुनसान और उजाड़ करके दानव को दण्ड मिला।)

Question 9.
what was his offence?
(उसका अपराध क्या था ?)
Answer:
His offence was that he was selfish. He made a wall around the garden and checked the entry of the children.
(उसका अपराध यह था कि वह स्वार्थी था। उसने बाग के चारों ओर दीवार बनवा दी थी और बच्चों का प्रवेश रोक दिया।)

Question 10.
How did the garden of the Giant look throughout the year now ? .
(अब पूरे वर्ष दानव का बाग कैसा दिखाई देता था ?)
Answer:
Throughout the year the garden now looked desolated. Snow and frost covered. it. The North wind roared all the day and blew the chimney pots down. Hail also came there and brought destruction. Thus, the beautiful garden changed into a heap of ruin.
(अब पूरे वर्ष बाग उजाड़ दिखाई देता था। बर्फ और कोहरे ने इसे ढक लिया था। उत्तरी हवा दिनभर चलती थी और चिमनी को गिरा देती थी। ओले भी आते थे और विनाश करते थे। इस प्रकार सुन्दर बाग खण्डहर के ढेर में बदल गया।)

Question 11.
when did the spring come again into the garden?    [Imp.]
(वसन्त बाग में पुन: कब आया ?)
Answer:
The spring came again into the garden when one day the children entered there through a small hole in the wall.
(वसन्त, बाग में पुन: उस समय आ गया जब दीवार के एक छोटे से छिद्र से होकर बच्चे बाग में आ गये।)

Question 12.
what was the Giant’s reaction now ?   [Imp.]
(अब दानव की क्या प्रतिक्रिया थी ?)
Answer:
Now the Giant’s reaction was positive. He had realised his mistake. So he did not stop the children from playing there this time.
(अब दानव की प्रतिक्रिया सकारात्मक थी। उसने अपनी भूल का अनुभव कर लिया था। इस बार उसने. बच्चों को वहाँ खेलने से नहीं रोका।)

Question 13.
How and when did the Giant come to know about the children’s entry into the garden?
(दानव को बाग में बच्चों के प्रवेश के विषय में कब और कैसे पता लगा ?)
Answer:
One morning the Giant was lying awake in the bed. He heard some sweet music and smelt delicious perfume coming through the open casement. He thought spring had come. When he peeped out, he saw the children also playing there.
(एक दिन सवेरे दानव अपने बिस्तर में जागा पड़ा था। उसने कुछ मधुर संगीत सुना और खुली हुई खिड़की से आती हुई मधुर महक को सँघा। उसने सोचा कि वसन्त आ गया है। जब उसने बाहर को झाँका, तब देखा कि वहाँ बच्चे भी खेल रहे हैं।)

Question 14.
what happened when Giant came into the garden ?
(जब दानव बाग में आया तब क्या घटित हुआ ?)
Answer:
When the Giant came into the garden, all the children ran away with fear and the spring also went away.
(जब दानव बाग में आया तब डर के मारे बच्चे भाग गये और वसन्त भी चला गया।)

Question 15.
what did the Giant do then ?
(तब दानव ने क्या किया ?)
Answer:
Then the Giant knocked down the wall and removed the notice. He took up the child, standing alone under a tree, in his arms and seated him on the tree. The tree at once blossomed and birds began to sing.
(तब दानव ने दीवार को गिरा दिया और नोटिस हटा दिया। उसने उस बच्चे को, जो पेड़ के नीचे अकेला खड़ा था, गोद में उठा लिया और पेड़ पर बिठा दिया। पेड़ एकदम फल-फूल गया और पक्षियों ने गाना आरम्भ कर दिया।)

Question 16.
when did the children come again into the garden and why?   [Imp.]
(बच्चे बाग में पुन: कब आए और क्यों ?)
Answer:
The children came again into the garden when they saw the Giant with the little boy in his arms because they thought that the Giant was not wicked but kind.
(बच्चे, बाग में पुनः आ गये जब उन्होंने उस दानव को एक छोटे बच्चे को गोद में लिए हुए देखा, क्योंकि वे समझ गए कि दानव दुष्ट नहीं है, बल्कि दयालु है।)

Question 17.
what did the Giant say to the children ?
(दानव ने बच्चों से क्या कहा?)
Answer:
The Giant said to the children, “It is your garden now. Come and play here daily.”
(दानवे ने बच्चों से कहा, “यह बाग तुम्हारा है। प्रतिदिन यहाँ आओ और खेलो।”)

Question 18.
How do you know that the Giant was a changed person ?
(आप कैसे जानते हो कि दानव एक बदला हुआ व्यक्ति है।)
Answer:
I come to know that the Giant was a changed person because now he said to the children,
“It is your garden now. Come and play here daily.”
(मैं जानता हूँ कि दानव एक बदला हुआ व्यक्ति है क्योंकि अब उसने बच्चों से कहा, “अब यह तुम्हारा बाग है। आओ और यहाँ प्रतिदिन खेलो।)

Question 19.
why was the Giant rewarded?
(दानव को पुरस्कृत क्यों किया गया ?)
Answer:
The Giant was rewarded because he had realised his mistake. Now he was no more selfish.
He had become kind and had allowed the children to play in the garden.
(दानव को पुरस्कृत किया गया क्योंकि उसने अपनी भूल का अनुभव कर लिया था। अब वह स्वार्थी नहीं था। वह दयालु हो गया था और उसने बच्चों को बाग में खेलने की स्वीकृति दे दी थी।)

Question 20.
What was his reward ?   [Imp.]
(उसका पुरस्कार क्या था ?)
Answer:
His reward was that the spring came in his garden again and made it beautiful.
(उसका पुरस्कार यही था कि बाग में वसन्त पुनः आ गया और इसे सुन्दर बना दिया।)

Question 21.
who was the little child whom the Giant had helped ?
(वह छोटा बच्चा कौन था जिसकी दानव ने सहायता की थी ?)
Answer:
The little child was an unknown child. The Giant saw him standing under a tree all alone when the other children had run away. He was too little to sit on the branch of a tree. The Giant seated him on the tree.
(वह छोटा बच्चा एक अज्ञात बच्चा था। दानव ने उसे एक पेड़ के नीचे अकेले खड़े हुए देखा जबकि अन्य सभी बच्चे भाग गए। वह इतना छोटा था कि पेड़ की शाख पर नहीं बैठ सकता था। दानव ने उसे पेड़ पर बिठाया।)

Question 22.
How did he repay the Giant?
(उसने दानव के एहसान का बदला कैसे चुकाया ?)
Answer:
The little child was in fact a divine child. He repaid the Giant by taking him to his garden Paradise.
(वास्तव में, यह एक दैवी बच्चा था। उसने दानव के एहसान का बदला उसे अपने साथ स्वर्ग बाग में ले जाकर चुकाया।)

Question 23.
Where was the Giant taken after his death? Who took him there and why ?
(मृत्यु के बाद दानवे को कहाँ ले जाया गया ? उसे वहाँ कौन तथा क्यों ले गया ?)
Answer:
After his death, the Giant was taken to Paradise, the garden of God. God took him there.
(मृत्यु के बाद दानव को स्वर्ग, जो कि भगवान् का बाग है, ले जाया गया। उसे भगवान् वहाँ ले गए।)

Question 24.
what moral does the story The Selfish Giant’ teach?   [M. Imp.]
(‘स्वार्थी दानव’ नामक कहानी हमें क्या नैतिकता सिखाती है ?)
Answer:
The story ‘Selfish Giant teaches us not to be selfish. But we should love and help others as much as we can.
(‘स्वार्थी दानव’ नामक कहानी हमें सिखाती है कि हमें स्वार्थी नहीं होना चाहिए, बल्कि जितना हम से हो सके उतना हमें दूसरों से प्रेम करना चाहिए और उनकी सहायता करनी चाहिए।)

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