Chapter 5 नीतिश्लोकाः (अनिवार्य संस्कृत)

1. सर्वे भवन्तु ………………………………………. दुःखभाग्भवेत्।।

हिन्दी अनुवाद – सब सुखी हों, सब नीरोग हों, सब सज्जन हों, कोई दुखी न हो।

2. अलसस्य ……………………………………….. कुतः सुखम् ।।

हिन्दी अनुवाद – आलसी व्यक्ति को विद्या कहाँ? विद्या के बिना धन कहाँ? धन के बिना मित्र कहाँ और मित्र के बिना सुख कहाँ?

3. विद्या ददाति …………………………………….. ततः सुखम् ।।

हिन्दी अनुवाद – विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता आती है, योग्यता से धन आता है, धन – से धर्म और धर्म से सुख मिलता है।

4. पुस्तकस्था ……………………………………….. तद् धनम् ।।

हिन्दी अनुवाद – पुस्तक में छिपी विद्या और दूसरे के हाथों में गया धने समय पर काम नहीं आता; अर्थातू अपना ज्ञान तथा अपने पास का धन ही मौके पर साथ देता है।

5. परोपकाराय …………………………………………… शरीरम् ।।

हिन्दी अनुवाद – परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं; परोपकार के लिए नदियाँ बहती (जल देती) हैं। परोपकार के लिए गायें दूध देती हैं; परोपकार के लिए ही यह मानव शरीर है; अर्थातू मानवों का जन्म ही परोपकार करने के लिए हुआ है।

अभ्यास

प्रश्न 1.
उच्चारण करें –
नोट – विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से स्वयं करें।

प्रश्न 2.
एक पद में उत्तर दें –

(क) सर्वे किं पश्यन्तु?
(ख) कस्य मित्रं न भवति?
(ग) विद्या किं ददाति?
(घ) कीदृशं धनं धनं न भवति?

उत्तर :

(क) भद्राणि।
(ख) अधनस्य।
(ग) विनयं।
(घ) परहस्तगतं।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (पूर्ति करके) –

(क) सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
(ख) अमित्रस्य कुतः सुखम्?
(ग) परोपकाराय दुहन्ति गावः।
(घ) धनात् धर्मः ततः सुखम् ।

प्रश्न 4.
बड़े वृत्त में दिए गए पदों के साथ छोटे वृत्त में दिए गए उचित क्रियापदों को जोड़ते हुए वाक्य रचना करें। (वाक्य रचना करके) –

(क) सर्वे सन्तु निरामयाः ।
(ख) विनयात् याति पात्रताम् ।
(ग) परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
(च) परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः ।
(छ) सर्वे भवन्तु सुखिनः ।
(ज) विद्या ददाति विनयं ।

प्रश्न 5.

UP Board Solutions for Class 6 Hindi Chapter 5 नीतिशलोकाः (अनिवार्य संस्कृत) 1

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