Chapter 6 गुरु गोरखनाथ (महान व्यक्तिव)

पाठ का सारांश

गुरु गोरखनाथ का भारत के धार्मिक इतिहास में बहुत महत्त्व है। विभिन्न विद्वानों ने गोरखनाथ का समय ईसी की नवीं शताब्दी से लेकर तेरहवीं शताब्दी तक माना है। गुरु गोरखनाथ मत्स्येंद्र नाथ के शिष्य एवं नाथ संप्रदाय के संस्थापक थे। उन्होंने अपने विचारों एवं आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए लगभग चालीस ग्रंथों की रचना की। संतोष, अहिंसा एवं जीवों पर दया गोरखनाथ का मूल मंत्र था। गुरु गोरखनाथ जी का एक भव्य विशाल मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर में स्थापित है। कहा  जाता है कि इन्हीं के नाम पर जिले का नाम गोरखपुर पड़ा। गुरु गोरखनाथ ने जीवन की शुद्धता बनाए रखने पर बल दिया। जीवन की शुद्धता के लिए धन संचय से दूर रहने का संदेश इन्होंने दिया। गुरु गोरखनाथ त्याग, साहस तथा शौर्य के साक्षात प्रतीक थे। इसे महान गुरु के महान संदेश अनंत काल तक मानव को आदर्श जीवनयापन की प्रेरणा देते रहेंगे।

अभ्यास

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

प्रश्न 1.
गोरखनाथ किसके शिष्य थे?
उत्तर :
गोरखनाथ मत्स्येंद्रनाथ के शिष्य थे।

प्रश्न 2.
गोरखनाथ की रचनाओं में जीवन की किन अनुभूतियों का वर्णन किया गया है?
उत्तर :
गोरखनाथ की रचनाओं में गुरु महिमा, इंद्रिय-निग्रह, प्राण साधना, वैराग्य, कुंडलिनी जागरण, शून्य समाधि आदि जीवन की अनुभूतियों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 3.
गुरु गोरखनाथ ने धर्म को सर्वसुलभ किस प्रकार बनाया? . .
उत्तर :
गुरु गोरखनाथ ने बौद्ध, शैव, शाक्त आदि पूर्ववर्ती संप्रदायों को स्वीकृत करके उनकी जटिलताओं को दूर कर सरल एवं सादगीपूर्ण व्यवस्था का निर्माण कर धर्म को सर्वसुलभ बनाया।

प्रश्न 4.
गोरखनाथ का मूल मंत्र क्या था?
उत्तर :
संतोष, अहिंसा एवं जीवों पर दया गोरखनाथ का मूल मंत्र था।

प्रश्न 5.
गोरखनाथ का प्रसिद्ध मंदिर कहाँ स्थित है?
उत्तर :
गोरखनाथ का प्रसिद्ध मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित है।

प्रश्न 6.
जीवन की शुद्धता के लिए किससे दूर रहने की प्रेरणा गोरखनाथ ने दी है?
उत्तर :
जीवन की शुद्धता के लिए गोरखनाथ ने धन संचय से दूर रहने की प्रेरणा दी है।

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