Chapter 8 महावीर स्वामी (महान व्यक्तित्व)

पाठ का सारांश

महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्द्धमान था। इनका जन्म 599 ईसा पूर्व में वैशाली (उत्तरी बिहार) के अन्तर्गत कुन्डग्राम में एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ तथा माता का नाम त्रिशला देवी था।  वर्द्धमान बाल्यकाल से ही बुद्धिमान, सदाचारी और विचारशील थे। नाना प्रकार के सांसारिक सुख-साधून होते हुए भी इनकी आत्मा में बेचैनी थी। इसी बीच वर्द्धमान के पिता का देहान्त हो गया। इससे वर्द्धमान को अत्यन्त दुख हुआ। सांसारिक मोह, माया को त्याग कर वर्द्धमान ने अपने बड़े भाई नन्दिवर्द्धन की आज्ञा लेकर संन्यास ले लिया। ये सत्य और शान्ति की खोज में निकल पड़े। इसके लिए इन्होंने तपस्या का मार्ग अपनाया। इनका विचार था कि कठोर तपस्या से ही मन में छिपे काम, क्रोध, लोभ, मद तथा मोह को समाप्त किया जा सकता है। बारह वर्षों की कठिन तपस्या के पश्चात् इन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। कठोर तपस्या के कष्टों को सफलतापूर्वक झेलने तथा इन्द्रियों को वश में कर लेने के कारण वे ‘महावीर’ कहलाने लगे।
जैनियों की मान्यता के अनुसार जैन धर्म में महावीर से पूर्व तेईस अन्य तीर्थंकर हुए हैं। महावीर इस । धर्म के अन्तिम तीर्थंकर थे। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात् महावीर स्वामी तीस वर्ष तक अपने धर्म का प्रचार बहुत उत्साह से करते रहे।
महावीर स्वामी के उपदेशों का जन साधारण पर गहरा प्रभाव पड़ा।  इन्होंने एक ऐसा मार्ग दिखाया जिस पर चलकर लोग मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। महावीर के अनुसार तीन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण बातें मनुष्य को मोक्ष-मार्ग पर ले जाती हैं। इसी को जैन धर्म में ‘त्रिरत्न’ कहा गया है। ये हैं- सम्यक् दर्शन (सही बात पर विश्वास), सम्यक् ज्ञान (सही बात का ज्ञान) तथा सम्यक् चरित्र (उचित कर्म)। महावीर स्वामी कर्मकाण्ड, यज्ञ और अनुष्ठान पर विश्वास नहीं करते थे। शुद्ध आचरण के लिए इन्होंने ‘पंच महाव्रतों सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का विधान समाज के सम्मुख प्रस्तुत किया।
बहत्तर वर्ष की अवस्था में महावीर स्वामी पाटलिपुत्र (पटना) के निकट पावापुरी नामक स्थान पर बीमार पड़े और यहीं इन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ।

अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
महावीर स्वामी का जन्म कब हुआ? इनके माता-पिता कौन थे?
उत्तर:
महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व वैशाली  (उत्तरी बिहार) के अन्तर्गत कुन्डग्राम में एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ तथा माता का नाम त्रिशला देवी था।

प्रश्न 2:
महावीर स्वामी के बाल जीवन के क्या अनुभव थे?
उत्तर:
कठोर तपस्या से ही मन में छिपे काम, क्रोध, लोभ, मद तथा मोह को समाप्त किया जा सकता है। यही महावीर स्वामी के बाल जीवन का अनुभव था।

प्रश्न 3:
इन्हें महावीर क्यों कहा जाने लगा?
उत्तर:
कठोर तपस्या के कष्टों को सफलतापूर्वक झेलने तथा  इन्द्रियों को अपने वश में कर लेने के कारण इन्हें ‘महावीर’ कहा जाने लगी।

प्रश्न 4:
वर्धमान की वेदना के कौन-कौन से मुख्य कारण थे?
उत्तर:
समाज में प्रचलित आडम्बर, ऊँच-नीचे की भावना, चरित्र-पतन तथा जीव हत्या वर्धमान क्री वेदना के मुख्य कारण थे। ”

प्रश्न 5:
जैन धर्म की मुख्य बातों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जैन धर्म की मुख्य बातें मनुष्य को मोक्ष-मार्ग पर ले जाती हैं। इन्हें ही जैन धर्म में ‘त्रिरत्न’ कहा गया है। ये हैं- सम्यक् दर्शन (सही बात पर विश्वास), सम्यक् ज्ञान (सही बात का ज्ञान) तथा सम्यक् चरित्र (उचित कर्म)।।

प्रश्न 6:
सही कथन के सामने सही (✓) तथा गलत कथन के सामने गलत (✘) का निशान लगाएँ
(क) महावीर स्वामी जैन धर्म के प्रचारक थे। (✓)
(ख) दुख जीतने का मार्ग दिखाने वाले को तीर्थंकर कहते हैं। (✓)
(ग) सम्यक खेती, सम्यक ज्ञान,  सम्यक चरित्र जैन धर्म के त्रिरत्न हैं। (✓)
(घ) महावीर स्वामी के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। (✘)

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