Chapter 9 चन्द्रगुप्त मौर्य (महान व्यक्तित्व)

पाठ का सारांश

चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने बाहुबल और अदम्य साहस से भारत में राजनैतिक एकता स्थापित की। सिकन्दर ने सिन्ध, पंजाब, तथा सीमा प्रदेश को जीता ओर यूनानी अधिकारियों को यहाँ का शासन सौंपकर लौट गया। अत्याचारी शासन से दुखी प्रजा को महत्त्वाकांक्षी चन्द्रगुप्त का नेतृत्व मिल गया।  चन्द्रगुप्त ने सेना संगठित की और यूनानियों को भारत-भूमि से बाहर निकाल दिया। इसने मगध साम्राज्य को जीता और यह राजधानी पाटलिपुत्र के सिंहासन पर बैठ गया।
उत्तर भारत के बाद सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बाँधने के लिए बंगाल, मालवा आदि राज्य इसने जीत लिया। सिकन्दर के सेनापति सेल्यूकस को भी इसने अपने अन्तिम युद्ध में हराया, तब सेल्यूकस ने अपनी पुत्री का विवाह इससे कर दिया। अपने विशाल साम्राज्य की व्यवस्था को इसने तीन भागों में बाँट दिया था।- (1) केन्द्रीय शासन, (2) प्रान्तीय शासन, (3) स्थानीय शासन। सेना, पुलिस तथा गुप्तचर व्यवस्था उत्तम कोटि की थी।  वह प्रजा की उन्नति और सुख-सुविधा के लिए सदैव तत्पर रहता था। इसने अनेक धर्मशालाएँ, पाठशालाएँ, अस्पताल, नहरें और सड़कें बनवाई। चौबीस वर्षों तक राज्य करने के बाद अपने पुत्र बिन्दुसार को शासन का भार सौंपकर यह साधु का जीवन बिताने लगा। 298 ई० पूर्व में चन्द्रगिरि पर्वत पर चन्द्रगुप्त का निधन हो गया।

अभ्यास-प्रश्न

प्रश्न 1:
चन्द्रगुप्त मौर्य कौन था?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य एक साहसी  और महत्त्वाकांक्षी सम्राट था।

प्रश्न 2:
मगध की राजधानी का क्या नाम था?
उत्तर:
मगध की राजधानी का नाम पाटलिपुत्र था।

प्रश्न 3:
चन्द्रगुप्त मौर्य ने प्रजा हित के लिए क्या-क्या कार्य किए?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य अपनी प्रजा की उन्नति के प्रति सदैव प्रयत्नशीन रहता था। उसने यातायात के ।  साधनों की समुचित व्यवस्था की। सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष लगवाए, कुएँ तथा धर्मशालाएँ बनवाई। सिंचाई हेतु अनेक तालाब और कुएँ खुदवाए।

प्रश्न 4:
चन्द्रगुप्त मौर्य जीवन के अन्तिम क्षणों में कहाँ और क्यों गए?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य जीवन के अन्तिम क्षणों में जैन मुनि भद्रबाहु के साथ चन्द्रगिरि पर्वत पर साधक के रूप में जीवन व्यतीत करने हेतु गए।

प्रश्न 5:
चन्द्रगुप्त मौर्य की शासन प्रणाली क्यों आदर्श बन गई ?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल में भारत का बहुमुखी विकास हुआ।  कृषि, व्यापार एवं ललित कला आदि के विकास हेतु शासन द्वारा अनेक सुविधाएँ दी जाती थीं। उस समय प्रजा की नैतिकता उच्चकोटि की थी। इस प्रकार चन्द्रगुप्त मौर्य की शासन प्रणाली आदर्श थी।

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