Chapter 9 नील-शृगालः

शब्दार्थाः –

कस्मिंश्चिदृ = किसी,
अरण्ये = जंगल में,
भ्राम्यन् = घूमता हुआ,
भीतः = डरा हुआ,
रजेकस्य = कपड़ा धोने वाले कें,
नीलभाण्डे = नील के हौज (नाद) में,
नगरोपान्ते = शहर के समीप,
आत्मानम् = अपने शरीर को,
उत्तमवर्णः = अच्छे रंग का,
स्वकीयोत्कर्षम् = अपनी उन्नति (लाभ) को,
साथयामि = सिद्ध करूँ,
आलोच्य = विचार करके,
आहूय = बुलाकर,
अभिषिक्तवती = अभिषेक किया है,
आधिपत्यम् = अधीनता,
शनैः – शनैः = धीरे,
केनचिद् = किसी के द्वारा,
यतः = क्योंकि,
विप्रलष्टा = ठगे गए (वंचित),
सम्मिल्य = मिलकर,
एकदैव = एक साथ,
महारावम् = ऊँची आवाज,
शब्दम् = आवाज,
दुरतिक्रमः = दुर्निवार, जिसका निवारण कठिन हो।

कस्मिंश्चिद्……………………….स्वीकृतवन्तः ।
हिन्दी अनुवाद – किसी वन में एक सियार रहता था। वह एक बार अपनी इच्छा से शहर के समीप घूमते हुए, कुत्तों से डरकर किसी धोबी के नील के हौज (नाद) में गिर पड़ा। इसके बाद इसने वन में जाकर अपने नीले रंग को देखकर सोचा, मैं अब उत्तमवर्ण (वाला) हैं, तब मैं अपनी उन्नति के लिए क्यों न उपाय करूं? ऐसा विचारने के बाद सियारों को बुलाकर उसने कहा, “माँ भगवती और वनदेवता ने अपने हाथ से जंगल के राजा के रूप में मेरा अभिषेक किया है, इसलिए अब से जंगल में मेरी आज्ञा से व्यवहार होना चाहिए। सियार उसका विशिष्ट वर्ण देखकर उसे प्रणाम करके बोले, “देवी की जैसी आज्ञा। इसी क्रम से जंगल के सब वासियों ने उसका आधिपत्य स्वीकार किया।

शनैः शनैः…………….यतः। |
हिन्दी अनुवाद – धीरे-धीरे व्याघ्र, सिंह आदि उत्तम प्राणियों को पाकर उसने अपनी जाति वालों (सियारों) । को दूर कर दिया। इसके बाद दुखी सियारों को देखकर किसी बूढ़े सियार ने यह प्रतिज्ञा की कि इसका एक ऐसा । उपाय करना होगा जिससे इसकी पोल खुल जाए क्योंकि व्याघ्र आदि सब इसके रंग से ठगे गए हैं और इसे सियार न जानकर राजा मानने लगे हैं। इसके बाद सायंकाल में सभी सियारों ने मिलकर वहाँ एक साथ ऊँची आवाज़ की। वह आवाज शब्द सुनकर उस नीले सियार ने भी अपनी जाति के स्वभाव के अनुसार उनके साथ ऊँची आवाज़ में बोलना शुरू कर दिया। ऐसा करने के कारण वह सिंह आदि द्वारा पहचान लिया गया और मारा गया।

यः………………………………नाश्नात्युपानहम्।।
हिन्दी अनुवाद – जिसका जो स्वभाव होता है, उसका निवारण कठिन है। यदि कुत्ते को राजा बना दिया जाए, तो क्या वह जूते नहीं चाटेगा? अर्थात् जरूर चाटेगा।

अभ्यासः ।

प्रश्न 1. उच्चारणं कुरुत
नोट – विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से स्वयं करें।

प्रश्न 2. एकपदेन उत्तरत
(क) शृगालः कुत्र वसति स्म?
उत्तर – कस्मिचिद् अरण्ये।
(ख) तस्य आधिपत्यं के स्वीकृतवन्तः?
उत्तर – अरण्यवासिनः।।
(ग) सर्वे शृगालाः सायंकाले किम् अकुर्वन्? ।
उत्तर – महारावम् । ।
(घ) सिंहः कं हतवान्?
उत्तर – नीलशृगालम् ।

प्रश्न 3. एकवाक्येन उत्तरत
(क) नीलवर्णः शृगालः किम् अचिन्तयत?
उत्तर– नीलवर्णः शृगालः अचिन्तयत्- अहमूइदानीम् उत्तमवर्णः, तदाहं स्वकीयोत्कर्ष किं न साधयामि।
(ख) वृद्ध शृगालेन किं प्रतिज्ञातमृ?
उत्तर
– वृद्ध शृगालेन प्रतिज्ञातम्- यथा अयं व्याघ्रादिभिः परिचितो भवति तथा उपायं करिष्यामः।
(ग) नीलवर्णः शृगालः किम् उक्तवान्?
उत्तर– नीलवर्णः शृगालः उक्तवान्- माँ भगवती वन देवता स्वहस्तेन अरण्यराज्ये अभिषिक्तवती । तद्यारभ्य अरण्ये अस्मदाज्ञया व्यवहारः कार्यः ।।

प्रश्न 4. मजूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयेत (पूर्ति करके) –
UP Board Solutions for Class 6 Sanskrit Chapter 9 नील-शृगाल 1
(क) कस्मिंश्चिद् अरण्ये एकः शृगालः वसति स्म।
(ख) सं रजकस्य नीलभाण्डे पतितः।।
(ग) भगवती वनदेवता स्वहस्तेन अरण्यराज्ये अभिषिक्तवती।
(घ) य स्वभावोहि यस्यस्ति स नित्यं दुरतिक्रमः।।

प्रश्न 5. वाक्यानि रचयत
उत्तर 
प्रतिवसति स्म
– एकः शृगालः प्रतिवसतिस्म।
महारावम् – सायंकाले सर्वे तत्र सम्मिल्य एकदैव महारावम् अकुर्वन् ।
शनैःशनैः – शनैः शनैः नीलशृगालः स्वजातीयान् दूरीकृतवान् ।
नीलभाण्डे – एकः शृगालः स्वजातीयान् दूरीकृतवान् ।

प्रश्न 6. संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत (करके)
(क) एक बार वह नील के पात्र में गिर गया। |
एकदा सः नीलभाण्डे पतितः।
(ख) सभी वनवासियों ने उसका आधित्य स्वीकार कर लिया।
सर्वे अरण्यवासिनः तस्य आधिपत्यं स्वीकृतवन्तः।
(ग) सभी ऊँची आवाज करन लगे।
सर्वे महारावम् अकुर्वन् ।।

प्रश्न 7. हिन्दीभाषायाम् अस्याः कथायाः अनुवादं कृत्वा पुस्तिकायां लिखत।।
नोट – छात्र स्वयं करें।
नोट – विद्यार्थी शिक्षण-सङ्केतः शिक्षक की सहायता से स्वयं करें।

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